दक्षिण के जल विवादों पर नए सिरे से सोचने की जरूरत: अमित शाह

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महाबलीपुरम, 20 अगस्त। वाय के न्यूज। दक्षिणी राज्यों के वर्षों से लंबित जल विवादों को जल्द सुलझाने के लिए केंद्र ने संबंधित राज्यों के साथ संयुक्त बैठकें करने की पहल का संकेत दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जल शक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अंतर राज्य परिषद को राज्यों के साथ मिलकर इन मुद्दों का समाधान निकालने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्यों का अपने हितों की रक्षा करना गलत नहीं है, लेकिन हितों की रक्षा के नाम पर पानी वर्षों तक उपयोग में न आए और दरिया में बह जाए, तो इससे किसी का हित सुरक्षित नहीं होता।

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने कहा कि दक्षिण भारत की विकास यात्रा पानी पर निर्भर है। कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य और पर्यावरण—चारों क्षेत्रों के लिए पानी इस क्षेत्र की बुनियादी जरूरत है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में जल बंटवारे से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान के बाद अब दक्षिण भारत के जल विवादों पर भी नए सिरे से विचार करना होगा।

शाह ने ब्रह्मपुत्र से कावेरी और गोदावरी तक महानदियों को जोड़ने की संभावना का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार इससे लंबे समय तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जलमार्ग विकसित किए जा सकते हैं, जिससे ईंधन की बचत, पर्यावरण संरक्षण और सस्ता परिवहन संभव होगा।

बैठक में दक्षिणी राज्यों ने लंबित जल विवादों को आपसी संवाद और सकारात्मक समाधान के जरिए जल्द सुलझाने के सुझाव पर सहमति जताई। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े मुद्दों को गृह मंत्रालय के परामर्श से सुलझाने पर भी सहमति व्यक्त की।

शाह ने कहा कि 2014 से अब तक क्षेत्रीय परिषदों की 70 बैठकें हुई हैं और इनमें उठाए गए 1,869 मुद्दों में से 1,445 यानी करीब 80 प्रतिशत का समाधान निकाला गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषदों को केंद्र और राज्यों के बीच सार्थक संवाद का मंच बनाया गया है।

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