एआई को ताकत देगा सरकार का डेटा, 15 हजार से ज्यादा डेटासेट वाला एआईकोष तैयार

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नई दिल्ली, 21 अगस्त। वाय के न्यूज। भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए अपने विशाल डेटा संसाधनों को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम तेज कर दिया है। इंडियाएआई मिशन के तहत विकसित एआईकोष में अब 15 हजार से अधिक डेटासेट, 300 एआई मॉडल और 30 टूलकिट उपलब्ध हैं। सरकार अब इस प्लेटफॉर्म पर ऐसे डेटा संसाधनों को जोड़ने पर जोर दे रही है, जिन्हें शोधकर्ता, स्टार्टअप और एआई डेवलपर भारतीय जरूरतों के अनुरूप समाधान तैयार करने में इस्तेमाल कर सकें।

इसी उद्देश्य से नई दिल्ली में एआईकोष पर एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का केंद्र केवल अधिक डेटा जुटाना नहीं, बल्कि डेटा को खोजने योग्य, समझने योग्य, आपस में इस्तेमाल योग्य और सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराना रहा।

डेटा ही एआई की बुनियाद

इंडियाएआई मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सौरभ विजय ने डेटा को भारत के संप्रभु एआई लक्ष्यों के लिए रणनीतिक संसाधन बताया। उनका कहना था कि देश में मौजूद डेटा परिसंपत्तियों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नवाचार और राष्ट्रीय विकास के लिए किया जाना चाहिए।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने एक महत्वपूर्ण समस्या की ओर ध्यान दिलाया। अलग-अलग मंत्रालयों और सरकारी संस्थानों में बड़ी मात्रा में डेटा मौजूद है, लेकिन उसे एक-दूसरे के साथ जोड़कर उपयोग करने के लिए डेटा का एक समान ढांचा, स्पष्ट मानक और सुरक्षित पहुंच जरूरी है।

यानी चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि भारत के पास कितना डेटा है, बल्कि यह भी है कि उस डेटा को एआई के लिए कितना उपयोगी बनाया जा सकता है।

हर डेटा एआई के लिए खुला नहीं होगा

कार्यशाला में डेटा साझा करने के साथ निजता और सुरक्षा का सवाल भी प्रमुख रहा। उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि कौन-सा डेटा कानूनी रूप से साझा किया जा सकता है, किस डेटा के इस्तेमाल में निजता संबंधी जोखिम हैं और किन परिस्थितियों में डेटा को सीमित पहुंच के साथ उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी डेटाबेस में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पहचान और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से संबंधित जानकारी हो सकती है। ऐसे में एआई के लिए डेटा उपलब्ध कराने और नागरिकों की निजता सुरक्षित रखने के बीच संतुलन जरूरी होगा।

कृषि से स्वास्थ्य तक अलग-अलग क्षेत्रों पर फोकस

कार्यशाला में तीन प्रमुख क्षेत्रों—स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान, कृषि एवं आजीविका तथा शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—पर अलग-अलग गोलमेज चर्चा हुई।

इन चर्चाओं में यह देखा गया कि इन क्षेत्रों में एआई विकसित करने के लिए किस तरह के डेटासेट की जरूरत होगी, डेटा उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है और जिम्मेदार तरीके से डेटा साझा करने की व्यवस्था कैसे बनाई जा सकती है।

इसका सीधा असर भविष्य में तैयार होने वाले एआई अनुप्रयोगों पर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, बेहतर कृषि डेटासेट से स्थानीय फसल, मौसम और कृषि संबंधी परिस्थितियों के अनुरूप एआई समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जबकि स्वास्थ्य संबंधी बेहतर डेटा से भारतीय परिस्थितियों पर आधारित एआई मॉडल तैयार करने में मदद मिल सकती है।

एआईकोष पर सुरक्षित डेटा आदान-प्रदान

कार्यशाला के दौरान इंडियाएआई, राष्ट्रीय ई-शासन प्रभाग (NeGD) और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना केंद्र (CDPI) ने अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु (IIIT-B) के माध्यम से समझौता ज्ञापन किया।

इसका उद्देश्य एआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में तकनीकी, नीतिगत और ज्ञान संबंधी सहयोग बढ़ाना है। समझौते के तहत बड़े पैमाने पर एआई आधारित शासन समाधान विकसित करने तथा एआईकोष पर डेटासेट, मॉडल और अन्य एआई संसाधनों के सुरक्षित आदान-प्रदान के लिए सहयोग किया जाएगा।

इंडियाएआई मिशन और एकस्टेप फाउंडेशन के बीच भी समझौता हुआ है। इसके तहत बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले एआई प्लेटफॉर्म, मॉडल और समाधान विकसित करने में सहयोग किया जाएगा।

अगला लक्ष्य—काम के डेटासेट की पहचान

कार्यशाला के अंत में अधिक उपयोगी डेटासेट को प्राथमिकता देने, अलग-अलग स्रोतों के डेटा में तालमेल बढ़ाने, निजता को ध्यान में रखते हुए डेटा साझा करने की क्षमता विकसित करने और एआईकोष में शामिल किए जाने वाले नए डेटा स्रोतों की पहचान करने पर जोर दिया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि एआई जैसी व्यापक तकनीक का महत्व इस बात से तय होगा कि उसका समाज और लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

इस पूरी पहल का महत्व इस बात में है कि भारत एआई के लिए केवल विदेशी मॉडल और तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपने देश के डेटा, भाषाओं, क्षेत्रों और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप एआई क्षमता विकसित करने के लिए डेटा का आधार तैयार कर रहा है।

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