डेटा राष्ट्रीय संपत्ति, विभागीय खांचों से बाहर निकलकर काम करें अधिकारी: प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली, 21 अगस्त। वाय के न्यूज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार के सचिवों से दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ देश के भविष्य को आकार देने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। उन्होंने डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए विभागीय खांचों और अलग-अलग प्रणालियों से बाहर निकलकर उसके साझा और प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में अवसंरचना एवं संपर्क, सुरक्षा एवं विदेश मामले तथा शासन से जुड़े मंत्रालयों और विभागों की भावी कार्य-योजना पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि सचिवों को तात्कालिक मुद्दों और आंकड़ों के साथ दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह भी विचार करना चाहिए कि देश के भविष्य को किस प्रकार आकार दिया जाए। अलग-अलग खांचों में काम करने की प्रवृत्ति को उन्होंने केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि मानसिकता से जुड़ी समस्या बताया।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों का स्वामित्व लेते हुए अपनत्व की भावना से काम करने और विभागों के बीच समन्वय को कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट के दौरान विभिन्न विभागों के समन्वित काम का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार डेटा के संग्रह, भंडारण और प्रबंधन में संसाधन लगाती है, लेकिन विभागीय खांचों और खंडित प्रणालियों के कारण इसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता। उन्होंने अधिक अंतःप्रचालनीयता और डेटा के प्रभावी उपयोग के लिए समाधान तलाशने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस्तेमाल में मानवीय हस्तक्षेप और विवेक सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने एआई की क्षमताओं को मानवीय विशेषज्ञता से जोड़ने के नए तरीकों की तलाश करने को कहा।

नीति-निर्माण में नए दृष्टिकोण के लिए उन्होंने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच अधिक सहभागिता का आह्वान किया। साथ ही, अनुसंधान और नवाचार, विशेषकर रक्षा क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने तथा भारत के रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत बताई।

प्रधानमंत्री ने समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने, पोत निर्माण के निर्धारित उद्देश्यों की मिशन मोड में समीक्षा करने और बंदरगाह विकास से आगे बढ़कर बंदरगाह आधारित विकास पर जोर दिया। उन्होंने विनिर्माण और निर्यातोन्मुखी इकाइयों के बीच बेहतर संपर्क की आवश्यकता भी बताई।

उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से कनिष्ठ सहयोगियों के साथ अनौपचारिक संवाद बढ़ाने और विभिन्न कैडरों तथा विभागों के बीच मजबूत नेटवर्क विकसित करने का आग्रह किया। बैठक में सचिवों ने क्षेत्रवार प्राथमिकताओं, उभरती चुनौतियों और कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

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