रायपुर, 29 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में NEET-UG 2026 की MBBS और BDS काउंसलिंग में डोमिसाइल, जाति और श्रेणी प्रमाणपत्रों को लेकर उठे सवालों के बाद शासन ने दस्तावेज सत्यापन को लेकर रुख स्पष्ट कर दिया है। अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्रवेश को अंतिम माना जाएगा। गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज पाए जाने पर संबंधित प्रवेश रद्द किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (CGDME) ने 18 अगस्त को NEET-UG 2026 की MBBS/BDS प्रथम चरण की मेरिट सूची जारी की थी। इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों के डोमिसाइल और श्रेणी संबंधी पात्रता को लेकर शिकायतें सामने आईं। मामले में दस्तावेजों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरे राज्यों की सूची में नाम होने का दावा
शिकायतों में कुछ अभ्यर्थियों के नाम दूसरे राज्यों की मेडिकल काउंसलिंग की राज्य-कोटा सूचियों में भी होने का दावा किया गया है। ऐसे मामलों में यह जांच का विषय होगा कि संबंधित अभ्यर्थी छत्तीसगढ़ के राज्य कोटे की पात्रता पूरी करते हैं या नहीं और उनके प्रस्तुत दस्तावेज वैध हैं या नहीं।
फिलहाल किसी निश्चित संख्या में अभ्यर्थियों के फर्जी डोमिसाइल प्रमाणपत्र साबित होने या MBBS प्रवेश रद्द किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मूल दस्तावेजों से होगी पात्रता की पुष्टि
काउंसलिंग प्रक्रिया में अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जाना है। डोमिसाइल, जाति और अन्य आरक्षण संबंधी दस्तावेजों की जांच के बाद ही संबंधित अभ्यर्थी की पात्रता स्पष्ट होगी।
यदि जांच में किसी अभ्यर्थी द्वारा गलत जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है और प्रवेश निरस्त किया जा सकता है।
श्रेणीवार आंकड़ों को लेकर भी सवाल
काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर राज्य में NEET के पिछले और वर्तमान वर्ष के आंकड़ों की तुलना करते हुए भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि केवल श्रेणीवार संख्या में बदलाव को फर्जी दस्तावेज का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए प्रत्येक अभ्यर्थी के दस्तावेज और पात्रता का सत्यापन जरूरी है।
पारदर्शिता पर रहेगी नजर
MBBS की सीमित सरकारी सीटों के कारण राज्य कोटे की पात्रता का सही निर्धारण महत्वपूर्ण है। दूसरे राज्य का पात्र अभ्यर्थी यदि नियमों के विरुद्ध राज्य कोटे का लाभ लेता है तो इससे स्थानीय पात्र अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
इसलिए अब निगाह दस्तावेज सत्यापन और शासन की जांच के परिणाम पर है।
