कस्टम्स अधिकारी के आदेश में ऐसे अदालती फैसलों का हवाला मिला जो मौजूद ही नहीं थे; सुप्रीम कोर्ट ने AI के इस्तेमाल में मानवीय जांच जरूरी बताई
नई दिल्ली, 3 सितंबर, वाय के न्यूज़। कस्टम्स विभाग के एक अधिकारी को कानूनी मामलों में AI की मदद लेना भारी पड़ गया। अधिकारी ने अपने आदेश में ऐसे अदालती फैसलों का हवाला दिया, जो जांच में मौजूद ही नहीं मिले या गलत तरीके से उद्धृत किए गए थे।
इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हीरा कारोबारी पर लगाए गए ₹425.27 करोड़ के जुर्माने को रद्द कर दिया।
क्या है मामला
मामला सूरत के एक हीरा कारोबारी से जुड़ा है। कस्टम्स विभाग का आरोप था कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) से हीरों के निर्यात में प्राकृतिक हीरों को लैब में तैयार हीरे के रूप में घोषित किया गया।
इस मामले में कस्टम्स के अतिरिक्त आयुक्त ने अक्टूबर 2025 में कारोबारी पर ₹425.27 करोड़ का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया था। गुजरात हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
आदेश में मिले फर्जी कानूनी संदर्भ
सुप्रीम कोर्ट ने कस्टम्स अधिकारी के आदेश में दिए गए अलग-अलग अदालती फैसलों और कानूनी संदर्भों की जांच की।
अदालत के सामने आया कि कुछ मामलों का अस्तित्व ही नहीं था, जबकि कुछ मामलों को गलत तरीके से उद्धृत किया गया था। यानी जिन फैसलों के आधार पर कानूनी निष्कर्ष निकाला गया, वे उन बातों का समर्थन नहीं करते थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर खामी माना और कस्टम्स का आदेश रद्द कर दिया।
AI मदद कर सकता है, फैसला नहीं कर सकता
सुप्रीम कोर्ट ने AI के इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। अदालत के मुताबिक AI कानूनी शोध और जानकारी जुटाने में मददगार हो सकता है, लेकिन उसके जवाब को बिना जांचे सही मान लेना उचित नहीं है।
खासकर कानूनी मामलों में हर केस लॉ और कानूनी संदर्भ की स्वतंत्र रूप से पुष्टि जरूरी है।
