तत्काल रिहाई का आदेश; न्यायपालिका पर टिप्पणी से जुड़े अवमानना मामले में गुलशन पाहुजा की अपील पर नोटिस
नई दिल्ली, 3 सितंबर, वाय के न्यूज़।
न्यायपालिका पर ‘तानाशाही’ और ‘मनमानी’ जैसी टिप्पणी करने के मामले में YouTuber गुलशन पाहुजा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से सुनाई गई 6 महीने की जेल की सजा पर रोक लगा दी और उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने पाहुजा की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह आदेश दिया।
क्या है मामला
गुलशन पाहुजा अपने YouTube चैनल ‘Fight 4 Judicial Reforms’ पर न्यायपालिका और कुछ न्यायिक अधिकारियों के कामकाज को लेकर वीडियो और टिप्पणियां करते थे।
इन टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू हुई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने मई 2026 में उन्हें दो अवमानना मामलों में दोषी ठहराया था।
हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में 6 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। दोनों सजाएं एक साथ चलनी थीं। इसके अलावा प्रत्येक मामले में ₹2,000 का जुर्माना भी लगाया गया था।
हाईकोर्ट में भी उठाए थे सवाल
सुनवाई के दौरान पाहुजा ने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अदालतों की कार्यप्रणाली को ‘तानाशाही’ और ‘मनमानी’ से जोड़ा था।
हाईकोर्ट ने उनकी टिप्पणियों को अदालत की गरिमा और न्याय प्रशासन के लिए आपत्तिजनक माना था। अदालत ने यह भी कहा था कि पाहुजा ने अपनी टिप्पणियों पर खेद नहीं जताया।
अब सुप्रीम कोर्ट करेगा मामले की सुनवाई
हाईकोर्ट के फैसले को पाहुजा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उनकी सजा पर रोक लगा दी है और तत्काल जेल से रिहाई का आदेश दिया है।
पीठ ने मामले में नोटिस जारी किया है। अब आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि हाईकोर्ट की ओर से दी गई सजा और अवमानना की कार्रवाई को बरकरार रखा जाए या नहीं।
