इससे बढ़ेगी किसानों की आमदनी
नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। बाजार में बिकने वाले आम आधारित पेयों में 22 से 25 प्रतिशत तक असली आम का गूदा (पल्प) अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। केंद्र सरकार का मानना है कि ऐसा होने पर तोतापुरी आम की खपत बढ़ेगी, किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और उपभोक्ताओं को भी ज्यादा गुणवत्ता वाले पेय मिलेंगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की समस्याओं पर बनी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की समीक्षा की। समिति ने बताया कि इस साल समय पर खरीद नहीं होने, प्रोसेसिंग क्षमता कम रहने और बाजार की कमजोर मांग के कारण किसानों को अपने आम कम कीमत पर बेचने पड़े।
समिति ने सुझाव दिया है कि जिन आम आधारित पेयों में 22 से 25 प्रतिशत तक वास्तविक आम का गूदा हो, उन्हें ही 5 प्रतिशत जीएसटी का लाभ मिले। इस प्रस्ताव पर कृषि मंत्रालय, एफएसएसएआई, वित्त मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और जीएसटी परिषद मिलकर विचार करेंगे।
रिपोर्ट में तोतापुरी आम की खेती और कारोबार को मजबूत करने के लिए कई अन्य सुझाव भी दिए गए हैं। इनमें किसानों से क्षेत्रवार खरीद की व्यवस्था, पुराने आम के बागों का कायाकल्प, फल की गुणवत्ता सुधारने के उपाय, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के जरिए प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना और नए निर्यात बाजार तलाशना शामिल हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल मौजूदा समस्या का समाधान करना नहीं, बल्कि तोतापुरी आम की पूरी व्यवस्था को इस तरह मजबूत करना है कि किसानों को भविष्य में भी उनकी उपज का बेहतर दाम मिलता रहे।
