स्पेन में चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी रुकी, विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप से बची वास्तुकला विरासत
चंडीगढ़, 22 जुलाई 2026 (वाय के न्यूज डेस्क)। स्पेन के बार्सिलोना में होने वाली चंडीगढ़ के ऐतिहासिक हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) और स्पेन स्थित भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद रोक दिया गया है। यह फर्नीचर चंडीगढ़ की आधुनिक वास्तुकला और शहर की संस्थागत विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार, नीलामी में शामिल फर्नीचर की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप का अनुरोध किया था। इसके बाद स्पेन स्थित भारतीय दूतावास ने संबंधित नीलामी घर से संपर्क किया और फर्नीचर को नीलामी सूची से हटा दिया गया।
पियरे जानेरे के डिजाइन से जुड़ी है विरासत
चंडीगढ़ को आधुनिक भारत के पहले नियोजित शहरों में शामिल किया जाता है। शहर की परिकल्पना प्रसिद्ध वास्तुकार ले कार्बुजियर के नेतृत्व में हुई थी, जबकि उनके सहयोगी पियरे जानेरे ने यहां के कई संस्थानों और कार्यालयों के लिए फर्नीचर डिजाइन किए थे।
ये फर्नीचर केवल उपयोग की वस्तुएं नहीं, बल्कि 1950 के दशक में विकसित आधुनिक वास्तुकला और डिजाइन परंपरा के प्रतीक माने जाते हैं। सागौन की लकड़ी और स्थानीय कारीगरी से तैयार इन फर्नीचर की अंतरराष्ट्रीय कला बाजार में काफी मांग रही है।
फर्नीचर के विदेश पहुंचने की होगी जांच
चंडीगढ़ प्रशासन अब इस बात की जांच करेगा कि हेरिटेज फर्नीचर भारत से बाहर कैसे पहुंचा और इसके स्वामित्व व हस्तांतरण से जुड़े तथ्य क्या हैं। प्रशासन की ओर से आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तथ्यों की जांच के बाद की जाएगी।
भारत की सांस्कृतिक विरासत संरक्षण नीति का हिस्सा
विदेशों में पहुंची भारतीय सांस्कृतिक संपदा को वापस लाने और उसके संरक्षण के लिए भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों में सक्रिय रही है। विदेश मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रयासों से कई प्राचीन मूर्तियां और पुरावशेष विभिन्न देशों से भारत वापस लाए गए हैं।
चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी रुकना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह मामला आधुनिक भारत की वास्तुकला विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
