35 साल बाद बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव, फखरुल और ओली अहमद के बीच मुकाबला

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ढाका, 20 अगस्त। वाय के न्यूज। बांग्लादेश में 35 साल बाद आज राष्ट्रपति पद के लिए प्रतिस्पर्धी चुनाव हो रहा है। नेशनल पार्लियामेंट के चैंबर में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक सांसद मतदान करेंगे। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का मुकाबला 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद से है।

राष्ट्रपति चुनाव में कुल 349 सांसद मतदान के पात्र हैं। BNP के पास संसद में 247 सीटें हैं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के पास 81 सीटें हैं। इस संख्या बल को देखते हुए फखरुल की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

1991 के बाद पहली बार दो उम्मीदवार

बांग्लादेश में संसदीय शासन व्यवस्था बहाल होने के बाद 1991 में राष्ट्रपति का चुनाव हुआ था। उसके बाद लगातार सात राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए। इस बार दो उम्मीदवार मैदान में होने के कारण 1991 के बाद यह पहला राष्ट्रपति चुनाव है जिसमें सांसदों को वास्तविक चुनावी मुकाबले में मतदान करना होगा।

इस चुनाव की एक और खासियत यह है कि मतदान गुप्त मतपत्र से नहीं होगा। सांसद मतपत्र पर अपनी पसंद के उम्मीदवार का पूरा नाम लिखकर उस पर हस्ताक्षर करेंगे।

फखरुल की जीत लगभग तय

BNP के पास संसद में स्पष्ट बहुमत होने के कारण मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को मजबूत स्थिति में माना जा रहा है। पार्टी के संसदीय दल की बैठक प्रधानमंत्री और BNP अध्यक्ष तारिक रहमान की अध्यक्षता में चुनाव से एक दिन पहले हुई। फखरुल ने सांसदों से उनके पक्ष में मतदान करने की अपील की।

कर्नल ओली अहमद विपक्षी 11-दलीय गठबंधन के उम्मीदवार हैं। वे पूर्व सैन्य अधिकारी और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष हैं।

24 जुलाई को शहाबुद्दीन ने दिया था इस्तीफा

राष्ट्रपति चुनाव की नौबत निवर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद आई। उन्होंने 24 जुलाई को बीमारी का हवाला देते हुए पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ दिया था। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने 20 अगस्त को राष्ट्रपति चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित किया।

नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण 21 अगस्त की शाम 7:30 बजे बंगभवन में प्रस्तावित है।

यह चुनाव बांग्लादेश की राजनीति में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 के आम चुनाव के बाद सत्ता में आए BNP के दौर में पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवार आमने-सामने हैं। हालांकि संसद में सत्तारूढ़ दल के भारी बहुमत के कारण परिणाम को लेकर अनिश्चितता बहुत कम है।

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