पाक में चीन-तुर्किये के सैन्य विमानों की असामान्य आवाजाही, भारत सतर्क

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नई दिल्ली, 21 अगस्त। वाय के न्यूज। पाकिस्तान में पिछले करीब 60 घंटों के दौरान चीन और तुर्किये के सैन्य परिवहन विमानों की असामान्य आवाजाही सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार चीनी सैन्य विमान रावलपिंडी के पास नूर खान और कराची के मसरूर एयरबेस पर उतरते देखे गए हैं, जबकि तुर्किये के सैन्य परिवहन विमान की भी पाकिस्तान में आवाजाही दर्ज की गई है। इस गतिविधि पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां नजर रख रही हैं।

सुरक्षा सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, भारी सैन्य परिवहन विमानों ने करीब 60 घंटे के दौरान पाकिस्तान के सैन्य हवाई अड्डों के कई चक्कर लगाए। हालांकि इन विमानों में क्या सामग्री लाई गई और उनका वास्तविक मिशन क्या था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। कुछ रिपोर्टों में संभावित रक्षा उपकरणों और ड्रोन की आपूर्ति की आशंका जताई गई है, लेकिन इसे पुष्ट तथ्य के रूप में स्थापित करने वाली कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

रिपोर्टों के अनुसार चीनी विमानों की गतिविधि नूर खान और मसरूर दोनों एयरबेस से जुड़ी बताई गई है। वहीं, तुर्किये वायुसेना के एक सैन्य परिवहन विमान की नूर खान एयरबेस पर आवाजाही भी दर्ज किए जाने की रिपोर्ट है। एक रिपोर्ट में विमान की पहचान एयरबस ए400एम एटलस और कॉलसाइन TUAF526 के रूप में की गई है।

नूर खान एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान वायुसेना का प्रमुख एयरबेस है, जबकि मसरूर कराची में स्थित महत्वपूर्ण वायुसेना अड्डा है। दोनों स्थानों पर विदेशी सैन्य परिवहन विमानों की गतिविधि ने पाकिस्तान में चल रही सैन्य हवाई आवाजाही को लेकर ध्यान खींचा है।

यह घटनाक्रम पाकिस्तान के चीन और तुर्किये के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग की पृष्ठभूमि में सामने आया है। पाकिस्तान और चीन के बीच लड़ाकू विमान, वायु रक्षा तथा अन्य सैन्य प्रणालियों से संबंधित लंबे समय से रक्षा सहयोग है। तुर्किये के साथ भी पाकिस्तान का ड्रोन, नौसैनिक प्रणालियों और एयरोस्पेस क्षेत्र में रक्षा सहयोग है।

7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस समझौते और पिछले 60 घंटों में सामने आई सैन्य विमान गतिविधि के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं किया गया है।

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