सोमालिया में तुर्किये का हथियार लदा जहाज हाईजैक, बढ़ी कूटनीतिक जटिलता, छह भारतीय भी सवार

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नई दिल्ली, 21 अगस्त। वाय के न्यूज। सोमालिया के तट पर छह भारतीयों समेत 10 सदस्यीय चालक दल वाले मालवाहक जहाज के हाईजैक से पश्चिमी हिंद महासागर में बढ़ते समुद्री खतरे को लेकर भारत की चिंता फिर सामने आई है। कैमरून के झंडे वाला M/V LUTUF तुर्किये के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियार और अन्य सैन्य सामग्री लेकर जा रहा था। हाईजैक के बाद तुर्किये के दो जहाजों के वहां पहुंचने और हेलीकॉप्टर-ड्रोन से निगरानी किए जाने की सूचना ने मामले को सामान्य समुद्री डकैती से आगे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति से जोड़ दिया है। इसके बाद हुई हवाई कार्रवाई में चार लोगों के मारे जाने की बात सामने आई है, हालांकि हमले के जिम्मेदार पक्ष और मृतकों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सोमालिया के अधिकारियों के अनुसार, जहाज को सोमवार को पुंटलैंड के ईल जिले में मर्राया से करीब 3.5 नॉटिकल मील दूर समुद्री लुटेरों ने कब्जे में लिया। इसके बाद जहाज को नुगाल तट की ओर ले जाया गया। चालक दल में छह भारतीयों के अलावा तुर्किये का एक नागरिक, जॉर्जिया का एक नागरिक और दो सर्बियाई सुरक्षा गार्ड शामिल हैं।

हथियारों से लदा जहाज होने से बढ़ी संवेदनशीलता

M/V LUTUF पर तुर्किये के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियारों के साथ संचार और सैटेलाइट उपकरण भी लदे थे। इस वजह से जहाज का अपहरण केवल वाणिज्यिक जहाज पर समुद्री डकैती का मामला नहीं रह जाता। हाईजैक के बाद तुर्किये के दो जहाजों की मौजूदगी और उसके हेलीकॉप्टर तथा ड्रोन से निगरानी की सूचना ने घटना में सैन्य और कूटनीतिक आयाम जोड़ दिया है।

सोमालियाई अधिकारी के अनुसार, मंगलवार को एक छोटी नाव से दो लोग जहाज के पास पहुंचे और लुटेरों को खात पहुंचाया। नाव के वापस लौटने के बाद हवाई हमला हुआ, जिसमें चार लोग मारे गए और दो घायल हुए। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि हमला किसने किया और मारे गए लोग समुद्री लुटेरों के समूह से जुड़े थे या नहीं।

भारत पहले से जता रहा है समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता

सोमालिया के तट पर हाल में समुद्री डकैती की घटनाओं में फिर बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल 2026 में एक सप्ताह के भीतर कई जहाजों के हाईजैक होने के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चेतावनी जारी की गई थी।

भारत के लिए यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय नागरिक बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर काम करते हैं और अदन की खाड़ी तथा पश्चिमी हिंद महासागर उनके लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं। जुलाई में भारतीय नौसेना ने अदन की खाड़ी में MV Golden Arsenal पर समुद्री डकैती की कोशिश नाकाम कर 21 सदस्यीय चालक दल को सुरक्षित किया था। चालक दल में एक भारतीय नागरिक भी था।

इससे पहले भी भारत सोमालिया के तट और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में M/V LUTUF पर छह भारतीयों की मौजूदगी इस घटना को नई दिल्ली के लिए सीधे सुरक्षा सरोकार से जोड़ती है।

सोमालिया की संप्रभुता और तुर्किये की भूमिका

घटना का कूटनीतिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है। एक ओर जहाज सोमालिया के तट के पास समुद्री लुटेरों के कब्जे में है, वहीं दूसरी ओर जहाज पर तुर्किये के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियार लदे होने की सूचना है और हाईजैक के बाद तुर्किये की सैन्य निगरानी सामने आई है। यदि हवाई हमला वास्तव में किसी विदेशी सैन्य पक्ष ने किया है, तो सोमालिया की संप्रभुता, कार्रवाई के अधिकार और संबंधित देशों के बीच समन्वय के सवाल उठते हैं।

फिलहाल इन सवालों का स्पष्ट उत्तर उपलब्ध नहीं है। इसलिए तुर्किये की ओर से किसी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। सबसे तत्काल चिंता जहाज पर मौजूद छह भारतीयों समेत पूरे चालक दल की सुरक्षा और उनकी सुरक्षित रिहाई है।

M/V LUTUF की घटना ऐसे समय हुई है जब पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री डकैती के पुराने खतरे के फिर उभरने और लाल सागर तथा अदन की खाड़ी में व्यापक अस्थिरता के कारण वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पहले ही चुनौती बनी हुई है। इस पृष्ठभूमि में यह घटना भारत के लिए समुद्री सुरक्षा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा और क्षेत्र में अपनी सुरक्षा भूमिका—तीनों को लेकर महत्वपूर्ण है।

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