भारत-चीन समेत कई देशों ने हेलीकॉप्टर और प्रशिक्षित दल भेजने की पेशकश की थी; काठमांडू बोला- अपने सुरक्षा बल सक्षम
काठमांडू, 28 अगस्त 2026। नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटे कोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद सैकड़ों लोगों की तलाश जारी है, लेकिन नेपाल सरकार ने विदेशी खोज और बचाव टीमों की तैनाती की पेशकश फिलहाल स्वीकार नहीं की है। भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश समेत कई देशों ने हेलीकॉप्टर और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम भेजने की पेशकश की थी।
प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली नेपाल सरकार का कहना है कि देश की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन एजेंसियां खोज एवं बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों से जुड़ी जानकारी, खोज, बचाव और दूतावासों के साथ समन्वय के लिए एक आपात प्रतिक्रिया तंत्र (ERT) भी बनाया है।
नेपाल ने विदेशी सहायता को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। राहत सामग्री और आर्थिक सहायता स्वीकार की जा रही है, लेकिन विदेशी खोज-बचाव दलों को जमीन पर उतारने के प्रस्ताव पर काठमांडू ने अपनी एजेंसियों को ही अभियान की जिम्मेदारी दी है। Reuters के अनुसार, दक्षिण कोरिया ने अपनी प्रतिक्रिया टीम भेजी है और नेपाल के साथ आगे की सहायता को लेकर बातचीत जारी है।
2015 का अनुभव बना आधार?
काठमांडू के इस फैसले के पीछे 2015 के विनाशकारी भूकंप का अनुभव भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ माना जा रहा है। उस समय भारत ने ‘ऑपरेशन मैत्री’ के तहत बड़े पैमाने पर राहत और खोज-बचाव अभियान चलाया था। भारतीय वायुसेना के विमान और हेलीकॉप्टर, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें, चिकित्साकर्मी और इंजीनियर नेपाल पहुंचे थे।
हालांकि इस बार नेपाल की स्थिति अलग है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रासुवा क्षेत्र चीन के तिब्बत से लगी संवेदनशील सीमा पर है। विदेशी बचाव टीमों को अनुमति देने से जुड़े फैसले में संप्रभुता और सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलताओं की चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाहरी मदद न लेने का कारण अपने संसाधनों और सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता को बताया है।
सैकड़ों विदेशी भी लापता
नेपाल के विदेश मंत्रालय के 27 अगस्त के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भोटे कोशी बाढ़ के बाद 33 देशों के 596 विदेशी नागरिक अब भी लापता थे। इनमें भारत के 167, चीन के 100, अमेरिका के 66, यूक्रेन के 53, मलेशिया के 51 और ब्रिटेन के 33 नागरिक शामिल थे।
विदेशी नागरिकों की बड़ी संख्या को देखते हुए नेपाल ने आपात प्रतिक्रिया टीम को खोज, बचाव, सूचना सत्यापन और कांसुलर सहायता के समन्वय की जिम्मेदारी दी है।
