नेपाल : सुरंगों में फंसे सैकड़ों श्रमिकों को बचाने की जद्दोजहद, मृतकों की संख्या 939 पहुंची

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काठमांडू, 1 सितंबर 2026। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ और मलबे से भरी जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे सैकड़ों श्रमिकों तक पहुंचना है। त्रिशुली-3ए समेत कई परियोजनाओं में सुरंगों को खोलने के लिए बचाव दल विस्फोटकों, भारी मशीनों और एयर पंपों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, आपदा में अब तक 939 लोगों की मौत हो चुकी है और 3,925 लोग लापता हैं। लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। विभिन्न जलविद्युत परियोजना स्थलों से अब तक 279 लोगों को बचाया गया है, जबकि देशभर में 11 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

सुरंगों में ऑक्सीजन पहुंचाने की कोशिश

बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों के प्रवेश मार्ग मलबे, पत्थरों और पानी से बंद हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार करीब 933 श्रमिकों और कर्मचारियों का संपर्क टूट गया है। इनमें से 600 से अधिक के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल सुरंगों तक पहुंच बनाने के लिए नियंत्रित विस्फोट, भारी उपकरण और एयर पंप का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ऊपरी त्रिशुली-3ए परियोजना में नेपाली सेना के इंजीनियर मलबा हटाने के लिए विस्फोट कर रहे हैं। इस परियोजना में 42 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। वहीं ऊपरी त्रिशुली-3बी में 122 लोगों के लापता होने की सूचना है। ऊपरी त्रिशुली-1 परियोजना में भी बड़ी संख्या में श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है।

भारत समेत कई देशों की टीमें जुटीं

बचाव अभियान में नेपाली और चीनी सैन्य दलों के साथ भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। भारत की ओर से विशेष बचाव और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

मलबे से बरामद शवों और अवशेषों की पहचान भी बड़ी चुनौती बन गई है। चितवन सहित कई इलाकों में बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं, लेकिन उनकी पहचान नहीं हो सकी है। शवों के संरक्षण के लिए पर्याप्त फ्रीजर उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिकारियों को अस्थायी दफन जैसे उपाय भी करने पड़े हैं। डीएनए नमूनों के जरिए पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

भारत ने नेपाल में राहत और बचाव के अलावा पीड़ितों की पहचान में भी सहयोग की पेशकश की है। भारत की विशेषज्ञ टीम डीएनए आधारित पहचान प्रक्रिया में नेपाली अधिकारियों की मदद कर रही है।

तिब्बत में भी भारी नुकसान

नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही हुई है। चीनी अधिकारियों के अनुसार तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग अब भी लापता हैं। चीन ने इस आपदा को अपनी जलविद्युत परियोजनाओं से जोड़ने वाले दावों को खारिज करते हुए उन्हें दुर्भावनापूर्ण अटकल बताया है।

नेपाल में आपदा से कम से कम 11 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। सड़कें, पुल, घर और ऊर्जा ढांचा भी बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हुआ है। खराब मौसम, दुर्गम पहाड़ी इलाकों और लगातार बने भूस्खलन के खतरे के बीच बचाव दल सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। समय बीतने के साथ अभियान और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

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