मॉस्को/नई दिल्ली, 10 अगस्त। रूस ने रणनीतिक समुद्री मार्गों पर अपनी निर्भरता और उनसे जुड़े जोखिम कम करने के लिए हिंद महासागर तक रेल संपर्क विकसित करने की संभावना तलाशने की बात कही है। इसके जरिए भारत समेत दक्षिण एशियाई बाजारों तक वैकल्पिक जमीनी मार्ग उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है।
रूसी उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन के अनुसार, ऐसा वैकल्पिक रेल मार्ग बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है। रूस इन दोनों महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक परिवहन गलियारों की तलाश कर रहा है।
मध्य एशिया और ईरान के रास्ते विकल्प
रूसी पक्ष ने भारत तक पहुंच के लिए तुर्कमेनिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान से होकर जाने वाले संभावित रेल मार्गों का उल्लेख किया है। हालांकि, इनमें से किसी एक मार्ग को अंतिम रूप दिए जाने की बात सामने नहीं आई है।
रूस और भारत के बीच पहले से अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य रूस, ईरान और भारत के बीच माल परिवहन को तेज और अधिक सुविधाजनक बनाना है। प्रस्तावित वैकल्पिक रेल संपर्क इसी व्यापक क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क को और विस्तार देने की दिशा में देखा जा सकता है।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई वैकल्पिक मार्गों की जरूरत
रूस का यह विचार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सामने आया है। हाल के घटनाक्रमों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री व्यापार के जोखिम को बढ़ाया है। ऐसे में रूस के लिए भारत और हिंद महासागर तक पहुंच के वैकल्पिक जमीनी मार्ग रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
भारत के लिए भी ऐसे रेल और बहु-माध्यमीय परिवहन गलियारे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने और यूरोप-मध्य एशिया से माल परिवहन के लिए अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं।
