हरेली महोत्सव 2026: कोंडागांव में बिखरी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मनमोहक छटा

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फरसगांव, 18 अगस्त। वाय के न्यूज। बस्तर सांस्कृतिक, साहित्य एवं कला परिषद जिला कोंडागांव के तत्वावधान में 16 अगस्त दिन रविवार को जिला मुख्यालय स्थित ऑडिटोरियम में ‘हरेली महोत्सव 2026’ का भव्य एवं गरिमाममय आयोजन किया गया। दोपहर 12 बजे से आयोजित इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा, कला, संस्कृति और विरासत की शानदार झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति प्रेमी एवं स्थानीय नागरिक शामिल हुए।

मुख्य अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति

कार्यक्रम में विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, नगर पालिका अध्यक्ष नरपति पटेल, तथा उपाध्यक्ष जसकेतु उसेंडी सहित वरिष्ठ लोक कलाकार, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों और कलाकारों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोक परंपरा की झलक

हरेली पर्व की पारंपरिक भावना को केंद्र में रखते हुए महोत्सव में लोकगीत, लोकनृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में प्रस्तुत हरेली पर्व पर आधारित लोक नाटक ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया।

महोत्सव में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला एवं हस्तशिल्प को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। काष्ठ शिल्प, पारंपरिक चित्रकला, जनजातीय वाद्य यंत्रों तथा स्थानीय हस्तशिल्प की प्रदर्शनी ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। दर्शकों ने स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों और पारंपरिक शिल्प को करीब से देखा तथा कलाकारों के हुनर की सराहना की।

स्मृति चिन्ह और कला प्रदर्शन

संस्था द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट करने के लिए सभी लोक चित्रकला के कलाकारों द्वारा एक अनूठा स्मृति चिन्ह तैयार किया गया था। हरेली त्यौहार को ही मुख्य आधार मानकर ये सभी पेंटिंग्स तैयार की गई थीं, जिन्हें कला प्रभारी और खेम वैष्णव जी के मार्गदर्शन में बनाया गया था।

विशेष आकर्षण और कलाकारों की उपस्थिति

कार्यक्रम में पद्मश्री अजय मंडावी, पद्मश्री पंडीराम मंडावी, पद्मश्री उषा बारले, नेशनल अवार्ड विजेता पंचू सागर, बेलमेटल कलाकार राजेंद्र बघेल और रॉट आयरन कलाकार तीजूराम विश्वकर्मा सहित अनेक वरिष्ठ एवं लोक कलाकारों की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उनके अनुभव और कला के प्रति समर्पण ने युवा कलाकारों को भी प्रेरणा दी।

आयोजन का मुख्य उद्देश्य

आयोजकों ने कहा कि हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, कृषि परंपरा, प्रकृति और लोक जीवन से जुड़ी हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। “हमर माटी हमर संस्कृति हमर पहचान” की भावना के साथ इस महोत्सव का उद्देश्य स्थानीय कला, लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

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