रायपुर। डॉ शीला गोयल की पुस्तक सबके राम को विमोचन करते हुए मुख्य अतिथि महंत डॉ रामसुंदर दास ने कहा कि राम जैसा आचरण करने पर ही रामराज्य आएगा। राम जनमानस के नायक हैं। समारोह की अध्यक्षता पूर्व कुलपति डॉ आभा सिंह ने की।
विमतारा में भाषा अस्मिता अकादमी के द्वारा आयोजित सबके राम पुस्तक के विमोचन समारोह में प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत संयोजक डॉ जे के गोयल ने किया। कलाकारों के एक दल ने लेखिका द्वारा रचित गीतों का गायन किया। मुख्य अतिथि पूर्व विधायक महंत रामसुंदर दास ने कहा कि रामचरित मानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है यह एक पूर्ण वैज्ञानिक ग्रंथ है। जीवन और जगत के सभी सूत्र इसमें है। विश्व आज आतंकवाद से भयभीत है ऐसे में यह ग्रंथ मानवता का पाठ पढ़ाता है। राम जैसे आचरण करने पर ही रामराज्य आ सकता है।समारोह की अध्यक्ष पूर्व कुलपति डॉ आभा सिंह ने कहा कि रामराज्य में कोई दुखी नहीं रहता था। वहां सत्ता सेवा थी। इस पुस्तक से पाठकों को नैतिक मूल्यों को फिर से स्थापित करने की प्रेरणा मिलती है। माता सीता के जीवन की भी गहरी जानकारी इस पुस्तक से मिलती है।पुस्तक मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों से सामना करने तथा स्वाभिमान की रक्षा की प्रेरणा देती है।लेखिका डॉ शीला गोयल ने कहा कि आज भी श्रीराम मोहिनी छवि वाले हैं। प्रभु राम के नाम से तुलसीदास भी तुलसी की तरह पवित्र हो जाते हैं।सारस्वत अतिथि पूर्व कुलपति डॉ अरुणा पलटा ने कहा कि जहां कहीं भी रामकथा होती है वहां स्वयं हनुमान जी बैठते हैं। इस आस्था को बड़े रोचक ढंग से लेखिका ने प्रकट किया। इसी तरह गिलहरी के योगदान का भी रेखांकन सुंदर रूप में किया गया है। उन्होंने इस पुस्तक पर केंद्रित एक कविता का पाठ किया।आंजनेय विश्वविद्यालय की अकादमिक निदेशक डॉ संध्या वर्मा ने कहा यह पुस्तक रचनाओं का सुंदर संगम है। प्रेरणादायक पुस्तक जीवन को आदर्श बनाने का संदेश देती है। आज मर्यादा और संस्कार तार तार हो रहे हैं, ऐसे में रामचरित मानस दुनिया को आलोकित करता है। लेखिका ने श्रीराम कथा के रोचक प्रसंगों का संकलन भी किया है।छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष शताब्दी पांडेय ने कहा कि डॉ शीला गोयल मन से भी हमारा और समाज का उपचार करती हैं। श्रीराम सबके हैं। उनके कारण मनुष्य में संवेदना सतत विद्यमान है।मंच का संचालन डॉ अरविन्द नेरल ने तथा आभार प्रकट डॉ सुधीर शर्मा ने किया।
इस अवसर पर पूर्व मुख्य सचिव अजय सिंह, पूर्व निर्वाचन आयुक्त डॉ सुशील त्रिवेदी, साहित्यकार गिरीश पंकज, राजेश गनोदवाले सहित अनेक कवि-लेखक उपस्थित थे।
रामराज्य के लिए राम जैसा आचरण चाहिए – महंत रामसुंदर दास
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