स्वदेशी ‘विहान’ चिप ने हासिल की सिलिकॉन सफलता

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

भारतीय घरों तक फाइबर ब्रॉडबैंड पहुंचाने का लक्ष्य

नई दिल्ली, 15 अगस्त। वाय के न्यूज। डीएलआई योजना से समर्थित चेन्नई की फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनी अहीसा डिजिटल इनोवेशन्स ने स्वदेशी वीईजीए माइक्रोप्रोसेसर का इस्तेमाल कर विकसित ब्रॉडबैंड चिप ‘विहान’ के साथ सिलिकॉन निर्माण के पहले चरण में सफलता हासिल की है। कंपनी का लक्ष्य इस चिप के जरिये भारतीय घरों तक फाइबर ब्रॉडबैंड पहुंचाने के लिए स्वदेशी नेटवर्किंग समाधान उपलब्ध कराना है।

‘विहान’ को फाइबर ब्रॉडबैंड के लिए विशेष रूप से तैयार नेटवर्किंग सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) के रूप में विकसित किया गया है। कंपनी ने गणतंत्र दिवस पर इसका टेप-आउट किया था और स्वतंत्रता दिवस पर इसके पहले चरण की सिलिकॉन सफलता हासिल की। अब कंपनी 2027 में उत्पादन टेप-आउट के लक्ष्य की ओर बढ़ेगी।

करीब 40 करोड़ रुपये की फंडिंग

अहीसा ने इस वर्ष की शुरुआत में तमिलनाडु इमर्जिंग सेक्टर सीड फंड और अन्य निजी निवेशकों के माध्यम से तमिलनाडु इंफ्रास्ट्रक्चर फंड मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन से करीब 40 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस राशि का इस्तेमाल उत्पाद विकास में तेजी लाने और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कंपनी के विस्तार के लिए किया जाएगा।

डीएलआई योजना से डिजाइन कंपनियों को बढ़ावा

केंद्र सरकार की डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना भारतीय स्टार्टअप और कंपनियों को विभिन्न रणनीतिक एवं व्यावसायिक उपयोग के लिए चिप डिजाइन करने में सहायता दे रही है। इनमें उपग्रह संचार, ड्रोन, निगरानी कैमरे, रक्षा एवं एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार और स्मार्ट मीटर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

सरकार के अनुसार, डीएलआई योजना के तहत समर्थित कंपनियों ने विभिन्न फाउंड्री में 30 से अधिक चिप डिजाइन टेप-आउट हासिल किए हैं और 10 करोड़ डॉलर से अधिक की वेंचर कैपिटल फंडिंग जुटाई है।

455 संस्थानों और स्टार्टअप को डिजाइन उपकरण

सरकार के सेमीकंडक्टर कार्यक्रमों के तहत अत्याधुनिक चिप-डिजाइन उपकरण 455 संगठनों को उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें 350 शैक्षणिक संस्थान और 105 स्टार्टअप शामिल हैं।

वहीं, ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम के तहत 71 शैक्षणिक संस्थानों ने भविष्य के कुशल कार्यबल को तैयार करने के उद्देश्य से 245 चिप डिजाइन टेप-आउट पूरे किए हैं।

अन्य भारतीय कंपनियों ने भी हासिल की उपलब्धियां

डीएलआई योजना के तहत समर्थित अन्य कंपनियों ने भी हाल में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स ने स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर का इस्तेमाल कर बीएलडीसी मोटर कंट्रोलर और मोटर ड्राइवर चिप के सिलिकॉन निर्माण के पहले चरण में सफलता हासिल की है।

नेट्रासेमी ने एकीकृत वीडियो एनालिटिक्स एक्सेलरेशन वाला 12 नैनोमीटर विजन एसओसी सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। ऑप्टोएमएल को 12 नैनोमीटर ‘कंप्यूट-इन-मेमोरी’ एसओसी प्राप्त हुआ है। माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज ने सीसीटीवी निगरानी कैमरों में अपने विजन एसओसी के उपयोग की संभावनाओं के लिए प्रामा इंडिया के साथ साझेदारी की है। इंडीसेमी को अपने ब्लूटूथ बीएलई 6 चिप मॉड्यूल के लिए वैश्विक प्रमाणन मिला है।

सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला पर जोर

सरकार का लक्ष्य केवल चिप डिजाइन तक सीमित न रहकर डिजाइन, निर्माण, उन्नत पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री, अनुसंधान एवं विकास और कुशल मानव संसाधन सहित पूरी सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला का इकोसिस्टम तैयार करना है।

जुलाई 2026 में 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय वाले सेमीकंडक्टर 2.0 को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना है।

सरकार के अनुसार, अहीसा जैसी कंपनियों की प्रगति से भारतीय चिप डिजाइन प्रयोगशाला स्तर से आगे बढ़कर सिलिकॉन निर्माण, परीक्षण और प्रमाणीकरण के चरण तक पहुंच रहे हैं। उत्पादन बढ़ने के साथ इन स्वदेशी डिजाइनों के बड़े पैमाने पर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर