छात्रों पर लहराया चाबुक, उल्टे BCI की पीठ पर

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NALSAR विवाद में सुप्रीम कोर्ट की BCI को फटकार, CJI सूर्यकांत बोले—छात्रों को विरोध का अधिकार, BCI का क्या काम; छात्रों-फैकल्टी पर दंडात्मक कार्रवाई पर रोक

नई दिल्ली। NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने BCI के उस कदम पर सवाल उठाया, जिसमें परिषद ने विश्वविद्यालय के 2026 बैच के कानून स्नातकों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है और इस मामले में BCI की दखल की जरूरत नहीं थी।

CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “उन्हें विरोध करने का अधिकार है। उन्हें कौन रोक सकता है?” उन्होंने यह भी कहा कि मामला उनके और छात्रों के बीच संवाद का है और सवाल किया कि BCI इसमें हस्तक्षेप क्यों कर रही है।

करीब 450 छात्रों ने जताई थी आपत्ति

विवाद की शुरुआत NALSAR के करीब 450 छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन को भेजे गए पत्र से हुई। छात्रों ने प्रस्तावित दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी।

छात्रों की आपत्ति CJI की उन टिप्पणियों से जुड़ी बताई गई थी, जो प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई थीं।

13 अगस्त को BCI ने लगाई थी रोक

छात्रों के विरोध के बाद BCI ने 13 अगस्त को देश के सभी State Bar Councils को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी कानून स्नातक को अगले आदेश तक अधिवक्ता के रूप में नामांकित न किया जाए।

BCI ने NALSAR के कुलपति से मामले पर तीन दिन में प्रमाणित तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी थी। परिषद ने अभियान को शुरू करने, उसका मसौदा तैयार करने, उसे प्रसारित करने और छात्रों को लामबंद करने में कथित तौर पर प्रमुख भूमिका निभाने वालों की जानकारी भी मांगी थी।

कुछ घंटों में बदला फैसला

BCI के शुरुआती आदेश के बाद विवाद बढ़ गया। परिषद ने कुछ ही घंटों में अपना आदेश संशोधित कर दिया और कहा कि 2026 बैच के अधिकांश छात्र अभियान में शामिल नहीं थे। इसलिए पूरे बैच को कथित misconduct के लिए नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

संशोधित आदेश में State Bar Councils को NALSAR के 2026 बैच के छात्रों का नामांकन करने की अनुमति दे दी गई।

इसके बाद BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने 14 अगस्त को घोषणा की कि 2026 बैच के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई है। BCI ने निष्कर्ष निकाला कि बैच के छात्रों की किसी अशांति या आंदोलन में भूमिका नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नोटिस दिया

BCI की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नोटिस जारी किया। अदालत ने BCI और संबंधित State Bar Councils के स्तर से NALSAR के छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।

BCI की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित सर्कुलर वापस ले लिया गया है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

CJI ने अपने छात्र जीवन का भी किया उल्लेख

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह स्वयं छात्र रहते हुए गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर छात्र गलत भी हों, तब भी उन्हें अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है।

CJI ने BCI की कार्रवाई को “totally uncalled for” बताया और BCI की भूमिका पर सवाल उठाए।

छात्रों को सुप्रीम कोर्ट बार आने का न्योता

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने NALSAR के छात्रों को भविष्य में सुप्रीम कोर्ट बार से जुड़ने और कानूनी सहायता से संबंधित काम करने के लिए आमंत्रित भी किया।

इस तरह 13 अगस्त को पूरे 2026 बैच के अधिवक्ता नामांकन पर रोक लगाने से शुरू हुआ घटनाक्रम 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, जहां BCI के कदम पर अदालत ने सवाल उठाए। BCI पहले नामांकन रोकने का आदेश वापस ले चुकी है और बाद में 2026 बैच के खिलाफ कार्यवाही भी बंद करने की घोषणा कर चुकी है।

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