सिविल जज भर्ती में तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त घटकर एक साल

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नई दिल्ली, 21 अगस्त। वाय के न्यूज। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य कानूनी प्रैक्टिस की अवधि तीन साल से घटाकर एक साल कर दी है। इससे कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए पात्र होने में लगने वाला समय दो साल कम होगा।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने शुक्रवार को मई 2025 के अपने फैसले की समीक्षा याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए यह व्यवस्था की। न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन ने अलग मत दिया।

अदालत के अनुसार, 31 मार्च 2027 के बाद जारी होने वाली भर्ती अधिसूचनाओं के तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास कम-से-कम एक साल की सक्रिय कानूनी प्रैक्टिस होनी चाहिए। प्रैक्टिस के प्रमाणपत्र का सत्यापन भी किया जाएगा।

वहीं, 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी भर्ती अधिसूचनाओं के लिए संक्रमणकालीन व्यवस्था की गई है। इस अवधि में कानून स्नातकों को पूर्व प्रैक्टिस की शर्त के बिना परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई है। चयनित उम्मीदवारों को पहले एक साल के लिए ट्रेनी न्यायिक अधिकारी के रूप में रखा जाएगा।

चयन के बाद उम्मीदवारों को संबंधित राज्य न्यायिक अकादमी में एक साल का गहन प्रशिक्षण लेना होगा। इसके बाद एक साल की संरचित लॉ क्लर्कशिप होगी। क्लर्कशिप के पहले छह महीने जिला न्यायाधीश या उच्चतर न्यायिक सेवा के न्यायाधीश के साथ और अगले छह महीने उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश के साथ होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों को अपने न्यायिक सेवा नियमों में इन बदलावों को लागू करने के लिए तीन महीने में आवश्यक संशोधन करने को कहा है।

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