नई दिल्ली, 6 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को अब कम उम्र से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक की पढ़ाई कराई जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 3 से 8 तक के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और एआई का नया पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। वहीं कक्षा 9 से 12 के लिए भी एआई और उससे जुड़े विषयों का सिलेबस तैयार कर लिया गया है।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि नई शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करना है। इसके तहत केवल कंप्यूटर चलाना ही नहीं, बल्कि तार्किक सोच, समस्या का समाधान, डेटा की समझ, एल्गोरिदम, पैटर्न पहचान और जिम्मेदारी के साथ एआई के उपयोग की शिक्षा भी दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में रोजगार और अवसर तेजी से बढ़ेंगे। इसलिए स्कूल स्तर से ही छात्रों में गणित, कंप्यूटेशनल थिंकिंग और कोडिंग की मजबूत नींव विकसित की जाएगी। शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को पहेलियों, खेलों और रोचक गतिविधियों के माध्यम से गणित और तार्किक सोच सिखाई जाएगी, जबकि मध्य कक्षाओं में कोडिंग की शुरुआत होगी।
और ने मिलकर इस पाठ्यक्रम के साथ शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण सामग्री और मार्गदर्शिकाएं भी तैयार की हैं। एआई विषय पढ़ाने वाले स्कूलों के लिए आवश्यक कंप्यूटर और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने एसओएआर (Skilling for AI Readiness) कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत कक्षा 6 से 12 के विद्यार्थियों को एआई, जनरेटिव एआई, साइबर सुरक्षा, प्रोग्रामिंग और एआई नैतिकता की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। शिक्षकों के लिए भी अलग से प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में एआई और रोबोटिक्स लैब स्थापित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की होगी, क्योंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है।
