WTO के मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते को मंजूरी दी
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2026 । भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही भारत इस समझौते का पक्षकार बनने वाला 123वां सदस्य बन गया है।
यह समझौता समुद्र में अवैध, अनधिकृत और अत्यधिक मछली पकड़ने को बढ़ावा देने वाली सब्सिडी पर रोक लगाने से जुड़ा है। इसका उद्देश्य समुद्री मछली संसाधनों का संरक्षण करना और टिकाऊ मत्स्य पालन को बढ़ावा देना है।
भारत के लिए इस समझौते का महत्व इसलिए भी है क्योंकि देश में समुद्री मत्स्य पालन का बड़ा हिस्सा छोटे और पारंपरिक मछुआरों पर आधारित है। वहीं, बड़े औद्योगिक बेड़ों द्वारा दूर-दराज के समुद्री क्षेत्रों में किए जाने वाले अत्यधिक दोहन को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। समझौते का फोकस ऐसी गतिविधियों पर सरकारी सहायता को सीमित करने पर है।
हालांकि, एक्वाकल्चर (मछली और झींगा पालन) तथा अंतर्देशीय मत्स्य पालन इस समझौते के दायरे में नहीं आते। इसलिए इन क्षेत्रों में काम करने वाले उत्पादकों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
यह समझौता जून 2022 में डब्ल्यूटीओ के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में मंजूर हुआ था और आवश्यक देशों की स्वीकृति मिलने के बाद सितंबर 2025 में लागू हुआ। भारत ने 20 जुलाई 2026 को इसका स्वीकृति पत्र जमा किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते का वास्तविक प्रभाव इसके क्रियान्वयन और विभिन्न देशों द्वारा सब्सिडी संबंधी नियमों के पालन पर निर्भर करेगा। भारत में भी इसके अनुरूप मौजूदा मत्स्य प्रबंधन व्यवस्था के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
