नई दिल्ली, 9 अगस्त। भारत ने समुद्री प्रशासन और सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘ई-समुद्र’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म नाविकों, जहाजरानी कंपनियों, बंदरगाहों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों के लिए विभिन्न सेवाओं को एक ही डिजिटल व्यवस्था में लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय हितधारक संवाद के दौरान केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ई-समुद्र का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का फोकस नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण के साथ समुद्री प्रशासन को आधुनिक बनाने पर रहा।
ई-समुद्र के तहत समुद्री सेवाओं को ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी बनाने की योजना है। इसमें ऑनलाइन भुगतान, रियल टाइम ट्रैकिंग और डिजिटल प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएं शामिल की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य प्रक्रियाओं को केवल ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि उन्हें अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और पूर्वानुमानित बनाना है।
नाविकों के लिए 24 घंटे शिकायत व्यवस्था
ई-समुद्र के साथ नाविकों के लिए ई-नाविक 24×7 शिकायत निवारण प्रणाली भी शुरू की गई है। इसके अलावा सीफेयरर ट्रैकिंग डैशबोर्ड और डिजिटल सीफेयरर्स एम्प्लॉयमेंट एग्रीमेंट (d-SEA) जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
नाविकों के कल्याण के लिए सीफेयरर्स वेलफेयर फंड सोसाइटी के माध्यम से अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं। ‘सागर में योग’ के जरिए समुद्र में कार्यरत नाविकों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने तथा ‘सागर में सम्मान’ के जरिए महिला नाविकों के लिए बेहतर अवसर और सहयोग उपलब्ध कराने की पहल भी सामने रखी गई।
2013 के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा हुआ समुद्री कार्यबल
सरकार के अनुसार भारत में सक्रिय नाविकों की संख्या 2013 में करीब 1.03 लाख थी, जो 2025 में बढ़कर 3.23 लाख से अधिक हो गई। बढ़ते समुद्री कार्यबल के साथ डिजिटल सेवाओं, नियमन और कल्याणकारी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत भी बढ़ी है।
सोनोवाल ने कहा कि भारत अब दुनिया में नाविकों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता बन सकता है। उन्होंने भारत को प्रमुख जहाज रीसाइक्लिंग केंद्र और दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
संकट के समय 4 हजार से अधिक नाविकों की वापसी
कार्यक्रम में समुद्री क्षेत्र पर हालिया भू-राजनीतिक संकटों के प्रभाव का भी उल्लेख किया गया। मंत्रालय के अनुसार DGMA ने 16 हजार से अधिक कॉल की निगरानी, 40 हजार से अधिक संचारों को संभालने और विभिन्न सरकारी एजेंसियों, भारतीय दूतावासों, नौसेना तथा जहाज मालिकों के साथ समन्वय के जरिए 4 हजार से अधिक फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी में मदद की।
ई-समुद्र को समुद्री प्रशासन को पारंपरिक कार्यालय आधारित व्यवस्था से डिजिटल और फेसलेस गवर्नेंस की ओर ले जाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब Merchant Shipping Act, 2025 भी लागू हो चुका है। यह कानून 15 मार्च 2026 से प्रभावी हुआ और इसमें नाविकों की सुरक्षा, कल्याण, रोजगार, वेतन, काम के घंटे, चिकित्सा देखभाल और स्वदेश वापसी जैसे अधिकारों के लिए विस्तृत प्रावधान हैं।
सरकार का दावा है कि एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से समुद्री क्षेत्र में सेवा वितरण बेहतर होगा, अनुपालन का बोझ घटेगा और नाविकों तथा अन्य हितधारकों को सरकारी सेवाओं तक पहुंच अधिक आसान होगी।
