जयपुर, 9 अगस्त। क्या सड़क बनाने के लिए बिटुमिन और पत्थरों को गर्म करना जरूरी है? केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) की स्वदेशी Modified Mix Seal Surfacing Plus (MSS+) तकनीक इस पारंपरिक प्रक्रिया का विकल्प पेश कर रही है। CSIR-CRRI ने जयपुर में राजस्थान सरकार के सामने इस तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया।
राजस्थान के मुख्य सचिव ने तकनीक की कार्यप्रणाली और सड़क निर्माण एवं अनुरक्षण में इसकी संभावनाओं की समीक्षा की। प्रदर्शन के दौरान बताया गया कि MSS+ में सड़क की सतह तैयार करने के लिए सामग्री को पारंपरिक हॉट-मिक्स की तरह उच्च तापमान पर गर्म करने की आवश्यकता नहीं होती।
कैसे काम करती है MSS+?
MSS+ मूल रूप से एंबिएंट-टेम्परेचर यानी सामान्य वातावरण के तापमान पर काम करने वाली सड़क तकनीक है। इसमें अलग-अलग आकार के क्रश्ड एग्रीगेट को विशेष रूप से तैयार पॉलिमर-मॉडिफाइड बिटुमिनस इमल्शन और आवश्यक खनिज एडमिक्सचर के साथ मिलाकर सड़क की सतह पर लगाया जाता है।
इस प्रक्रिया में हॉट-मिक्स सड़क निर्माण की तरह बिटुमिन और एग्रीगेट को पहले उच्च तापमान तक गर्म करने की जरूरत नहीं पड़ती। यही अंतर इस तकनीक को कम ऊर्जा और कम उत्सर्जन वाली सड़क निर्माण तकनीक बनाता है।
ऊर्जा की खपत में 70 से 80 फीसदी तक कमी का दावा
CSIR के तकनीकी आकलन के अनुसार, गर्म करने की प्रक्रिया को हटाने से MSS+ में सड़क निर्माण के दौरान ऊर्जा की खपत में करीब 70 से 80 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इससे ईंधन की खपत और निर्माण गतिविधियों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को भी कम करने की संभावना है।
हॉट-मिक्स प्रक्रिया में बिटुमिन और एग्रीगेट को गर्म रखने तथा गर्म सामग्री को निर्माण स्थल तक पहुंचाने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। MSS+ का सामान्य तापमान पर मिश्रण तैयार करने का तरीका इस ऊर्जा आवश्यकता को काफी हद तक कम कर सकता है।
दूर-दराज के इलाकों में उपयोग की संभावना
इस तकनीक का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका मोबाइल मिक्सिंग सिस्टम है। CSIR-CRRI ने MSS+ के लिए स्वदेशी Smart Mix Pro Automatic Plant विकसित किया है। इसे जरूरत के मुताबिक सड़क निर्माण स्थल के करीब ले जाया जा सकता है।
स्वचालित प्रणाली में सामग्री की मात्रा और मिश्रण को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे मिश्रण की एकरूपता बनाए रखने और मैनुअल हस्तक्षेप कम करने में मदद मिल सकती है।
यह सुविधा खासकर उन इलाकों में उपयोगी हो सकती है जहां हॉट-मिक्स प्लांट से सड़क निर्माण स्थल की दूरी अधिक होती है और गर्म मिश्रण को लंबे समय तक ढोना पड़ता है।
सड़क बनाने के साथ मरम्मत में भी इस्तेमाल
MSS+ का उपयोग केवल नई सड़क की ऊपरी सतह तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसे प्रिवेंटिव मेंटेनेंस में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी सड़क पूरी तरह खराब होने का इंतजार करने के बजाय उसकी सतह पर समय रहते उपचार कर उसे आगे होने वाली क्षति से बचाने की कोशिश की जा सकती है।
CSIR-CRRI के अनुसार इस तकनीक से सड़क की सतह पर स्किड रेजिस्टेंस और सतही बनावट में सुधार के साथ टिकाऊपन बढ़ाने की संभावना है। इससे सड़क के जीवन-चक्र में अनुरक्षण की जरूरत और लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
हर सड़क के लिए हॉट-मिक्स का विकल्प नहीं
MSS+ को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे हर प्रकार की सड़क के लिए हॉट-मिक्स का सीधा विकल्प नहीं माना जा सकता। तकनीक का प्रमुख उपयोग कम से मध्यम यातायात वाली सड़कों और टिकाऊ सड़क अनुरक्षण के लिए बताया गया है।
किस सड़क पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, यह यातायात भार, मौजूदा सड़क की संरचना, स्थानीय एग्रीगेट की गुणवत्ता, मौसम और अन्य इंजीनियरिंग मानकों के आधार पर तय करना होगा।
उत्तर प्रदेश में भी हुआ इस्तेमाल
CSIR-CRRI के अनुसार MSS+ तकनीक का उत्तर प्रदेश में 100 किलोमीटर से अधिक सड़क पर इस्तेमाल किया जा चुका है। फील्ड में इसके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के बाद अब राजस्थान में भी इसकी संभावनाओं को देखा जा रहा है।
राजस्थान जैसे बड़े राज्य में जहां ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में सड़क निर्माण और नियमित अनुरक्षण लगातार चुनौती है, वहां ऐसी तकनीक की उपयोगिता विशेष रूप से देखी जा सकती है।
सड़क निर्माण का बदलता मॉडल
MSS+ का महत्व केवल इस बात में नहीं है कि सड़क को गर्म किए बिना बनाया जा सकता है। इसका बड़ा पहलू ऊर्जा, ईंधन, परिवहन और उत्सर्जन को कम करने वाली सड़क निर्माण प्रणाली विकसित करना है।
यदि तकनीक का विभिन्न परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन सफल रहता है और इसकी लागत तथा टिकाऊपन पारंपरिक तरीकों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी साबित होते हैं, तो ग्रामीण और कम-मध्यम यातायात वाली सड़कों के निर्माण और अनुरक्षण में इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है।
