सभी रूट पर कंटेनर ट्रेन चलाने के लिए अब एक ही लाइसेंस

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भारतीय रेल ने बदली लाइसेंसिंग व्यवस्था, 25 करोड़ रुपये में मिलेगा ऑल इंडिया परमिट

नई दिल्ली, 6 अगस्त, वाय के न्यूज। भारतीय रेल ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (सीटीओ) के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सभी मार्गों पर परिचालन के लिए सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस की व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। अब अलग-अलग मार्ग श्रेणियों के लिए अलग लाइसेंस और अलग शुल्क की आवश्यकता नहीं होगी। नई व्यवस्था के तहत 25 करोड़ रुपये के एकमुश्त पंजीकरण शुल्क के साथ ऑपरेटर पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेनों का संचालन कर सकेंगे। संशोधित प्रावधानों को जल्द राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से लागू किया जाएगा।

रेल मंत्रालय के अनुसार, मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट (एमसीए) में संशोधन के बाद मौजूदा मार्ग-वार लाइसेंस प्रणाली समाप्त कर दी गई है। इससे लाइसेंस लेने और परिचालन की प्रक्रिया सरल होगी तथा नियामकीय और अनुपालन संबंधी खर्च में कमी आएगी। नए नियमों के तहत सभी नए आवेदकों के लिए 25 करोड़ रुपये का एकसमान, अप्रतिदेय पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।

मंत्रालय ने लाइसेंस विस्तार के नियमों में भी राहत दी है। कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को उनकी कन्सेशन अवधि समाप्त होने के बाद संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर 20 वर्ष का विस्तार दिया जा सकेगा। इसके लिए किसी प्रकार का नवीनीकरण या विस्तार शुल्क नहीं लिया जाएगा।

मौजूदा ऑपरेटरों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। कैटेगरी-1 के लाइसेंसधारी अपनी वर्तमान कन्सेशन अवधि पूरी होने तक पुराने नियमों के तहत परिचालन जारी रख सकेंगे और नई व्यवस्था में आने पर उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। वहीं कैटेगरी-2, 3 और 4 के ऑपरेटरों को नई व्यवस्था अपनाने के लिए 15 करोड़ रुपये अतिरिक्त जमा करने होंगे। यह राशि पहले जमा 10 करोड़ रुपये और नए 25 करोड़ रुपये के पंजीकरण शुल्क के बीच का अंतर है। ऐसे ऑपरेटर चाहें तो अपनी मौजूदा कन्सेशन अवधि पूरी होने से पहले भी नई व्यवस्था में शामिल हो सकते हैं।

रेल मंत्रालय का कहना है कि नई लाइसेंसिंग व्यवस्था से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और कंटेनर आधारित रेल माल परिवहन को गति मिलेगी। इससे उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी। साथ ही सड़क से रेल की ओर माल परिवहन बढ़ने से राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़भाड़ घटेगी, ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। सरकार का मानना है कि यह सुधार कारोबार सुगमता बढ़ाने और अधिक टिकाऊ माल परिवहन प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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