नई दिल्ली, 21 अगस्त। वाय के न्यूज। रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीनी की कीमत पिछले एक महीने में करीब 16 प्रतिशत बढ़ गई है। 20 जुलाई को जहां चीनी 48.18 रुपये किलो थी, वहीं 20 अगस्त को इसकी कीमत 55.70 रुपये किलो पहुंच गई। त्योहारों से पहले कीमतों में और बढ़ोतरी न हो और बाजार में चीनी की कमी न पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने का फैसला किया है।
सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों पर 1 अगस्त से 30 नवंबर तक 400 टन की स्टॉक सीमा भी लगा दी है। एक सितंबर से थोक खरीदार 15 दिन की जरूरत से ज्यादा चीनी अपने पास नहीं रख सकेंगे। सरकार और राज्य सरकारों की टीमें चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक की जांच भी कर रही हैं।
उत्पादन कम, लेकिन अभी कमी नहीं
इस साल देश में करीब 306 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। यह शुरुआती अनुमान 343 लाख टन से करीब 37 लाख टन कम है। गन्ने में बीमारी, ज्यादा बारिश और खेतों में जलभराव से उत्पादन प्रभावित हुआ है।
हालांकि सरकार का कहना है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी मौजूद है। इसके अलावा शुल्क-मुक्त आयात से बाजार में उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
अक्टूबर से बढ़ेगा उत्पादन
सरकार ने राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी है। सरकार के अनुमान के मुताबिक अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन के मुकाबले 10 लाख टन से ज्यादा हो सकता है। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखना है।
दुनिया में भी चीनी महंगी
चीनी की कीमत केवल भारत में ही नहीं बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमत बढ़ी है। 30 जून को अंतरराष्ट्रीय कीमत 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। सरकार के अनुसार 2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी रहने का अनुमान है।
सरकार ने इथेनॉल को जिम्मेदार मानने से किया इनकार
चीनी महंगी होने के पीछे इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराए जाने पर सरकार ने कहा है कि ऐसा नहीं है। उसके मुताबिक इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 के करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में करीब 9 प्रतिशत रह गया है। देश में बनने वाले इथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से बनता है।
सरकार ने कीमत बढ़ने के पीछे कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने को नुकसान, दुनिया में कम आपूर्ति और कुछ कारोबारियों द्वारा जमाखोरी-सट्टेबाजी को कारण बताया है।
सरकार के मुताबिक 20 अगस्त तक 2025-26 सीजन के गन्ना किसानों के 97 प्रतिशत बकाये का भुगतान किया जा चुका है। सरकार ने कहा है कि वह चीनी के स्टॉक और कीमतों पर नजर रखेगी तथा जमाखोरी और अनावश्यक कीमत बढ़ोतरी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी।
