वंदे मातरम् को मिला राष्ट्रीय गान जैसा कानूनी संरक्षण, राष्ट्रपति की मंजूरी

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अपमान करने वाले को तीन साल तक कारावास का प्रावधान

नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026, वाय के न्यूज। राष्ट्रपति ने प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) अधिनियम, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण मिल गया है। संसद के मानसून सत्र में पारित इस संशोधन के बाद अब राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या उससे जुड़े किसी समारोह में व्यवधान उत्पन्न करना दंडनीय अपराध होगा।

संशोधन के तहत प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर अधिनियम, 1971 की धारा 3 में बदलाव किया गया है। पहले यह धारा केवल राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के अपमान या उसके गायन में बाधा पहुंचाने के मामलों पर लागू होती थी। अब इसमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी शामिल कर लिया गया है। इसके परिणामस्वरूप यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालता है अथवा ऐसे किसी समारोह में व्यवधान उत्पन्न करता है, तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

सरकार के अनुसार यह संशोधन संविधान सभा की उस ऐतिहासिक भावना के अनुरूप है, जिसमें 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ‘वंदे मातरम्’ ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसे ‘जन गण मन’ के समान सम्मान प्राप्त होना चाहिए। अब तक इस सम्मान को कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं था, जिसे इस संशोधन के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है।

क्या बदला?

  • ‘वंदे मातरम्’ को अब ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक संरक्षण प्राप्त होगा।
  • 1971 के कानून की धारा 3 में राष्ट्रीय गीत को भी शामिल किया गया है।
  • राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालने पर तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
  • संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत, दोनों की समान गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करना है।

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