राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए छत्तीसगढ़ की सुनीता यादव चयनित

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सारंगढ़-बिलाईगढ़, 23 अगस्त। वाय के न्यूज। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव का चयन राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026 के लिए किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें प्रशस्ति पत्र, शाल और सम्मान राशि देकर सम्मानित किया जाएगा। प्राथमिक शिक्षा में नवाचार, डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल, बच्चों को अनुभव आधारित शिक्षा से जोड़ने और उनके पोषण पर किए गए कार्य उनके चयन के प्रमुख आधारों में शामिल हैं।

पढ़ाई में पीछे रह जाने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान

बरमकेला ब्लॉक में पदस्थ सुनीता यादव कक्षा में अपेक्षाकृत पीछे रह जाने वाले बच्चों को सीखने की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती हैं। उनका जोर केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने के बजाय बच्चों को गतिविधियों और अनुभवों के माध्यम से सीखने का अवसर देने पर है।

उन्होंने साहित्य को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ते हुए बच्चों के लिए कहानी, रचनात्मक गतिविधियों और अन्य साहित्यिक माध्यमों का इस्तेमाल किया है। इससे बच्चों में पढ़ने और अपनी बात कहने की रुचि विकसित करने पर काम किया गया।

डिजिटल माध्यमों से बदली पढ़ाने की शैली

सुनीता यादव ने कक्षा शिक्षण में सूचना एवं संचार तकनीक को भी शामिल किया है। वह बच्चों को दीक्षा एप और स्टोरीवीवर जैसे डिजिटल संसाधनों के माध्यम से पढ़ाती हैं। उन्होंने शिक्षण के लिए लघु फिल्में भी तैयार की हैं, जिनमें बच्चों और शिक्षिका ने स्वयं अभिनय किया है।

ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और रिपोर्टिंग जैसी गतिविधियों को भी उन्होंने बच्चों के सीखने की प्रक्रिया से जोड़ा है। स्कूल में स्मार्ट क्लास और रोजगारमूलक शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर भी काम किया जा रहा है।

बच्चों के पोषण पर व्यक्तिगत पहल

शिक्षिका का काम केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वह अपने स्तर पर नियमित दूध उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा अधिक से अधिक बच्चों को न्योता भोजन से जोड़कर उनके पोषण आहार में विविधता लाने का प्रयास करती हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर शोध

सुनीता यादव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्राथमिक विद्यालयों में हुए बदलावों पर शोध पत्र भी तैयार किया है। उनके काम में नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को स्थानीय स्कूलों की परिस्थितियों और बच्चों की जरूरतों से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।

उन्होंने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप भी चलाया और वहां अध्यापन किया।

राज्य शिक्षक सम्मान और साहित्यिक सम्मान भी मिला

शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सुनीता यादव को 2024 में राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। वर्ष 2025 में साहित्य के क्षेत्र में उन्हें पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण भी प्रदान किया गया।

शिक्षा के साथ वह सामाजिक गतिविधियों में भी भाग लेती हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए सीड बॉल तैयार करने और सैनिकों के लिए राखी बनाने जैसे अभियानों से भी उनका जुड़ाव रहा है।

शिक्षक परिवार से निकलीं सुनीता

सुनीता यादव का जन्म महासमुंद जिले के सांकरा-जोंक में शिक्षक पठान नाग यादव और रुपा यादव के परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सांकरा-जोंक में हुई। उन्होंने पिथौरा के कला महाविद्यालय से स्नातक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर और पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय बिलासपुर से बीएड किया।

उनका विवाह बरमकेला के व्यवसायी नंदकुमार यादव से हुआ। उनकी बेटी सृजना यादव गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई कर रही हैं।

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयन के साथ सुनीता यादव के काम को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उनका कार्य प्राथमिक शिक्षा में नवाचार, तकनीक, साहित्य और बच्चों के समग्र विकास को एक साथ जोड़ने की दिशा में केंद्रित रहा है।

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