राजनांदगांव में विश्व आदिवासी दिवस पर जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का उत्सव

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राजनांदगांव, 10 अगस्त 2026। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को राजनांदगांव के पद्मश्री गोविंद राम निर्मलकर ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक योगदान को केंद्र में रखकर सम्मेलन आयोजित किया गया। कंगला मांझी अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सैनिक संगठन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

राजमाता फुलवा देवी की अध्यक्षता और नगर निगम राजनांदगांव के महापौर मधुसूदन यादव के मुख्य आतिथ्य में हुए सम्मेलन में दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव और बस्तर क्षेत्र के लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया।

अंतरराष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली रंजीता कोरेटी और कंगला मांझी पर शोध करने वाले मीडिया क्षेत्र से जुड़े शोधकर्ता सुरेंद्र सिंह को स्मृति चिह्न और पदक देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मोहन हिडको, दिनेश कोरेटी और भुवनेश्वर नेताम अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

लोकनृत्य ने बांधा समां

सम्मेलन के दौरान कंगला मांझी नृत्य दल बघमार, कोंडागांव और राजनांदगांव के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।

भिलाई से यमुनोत्री वर्मा, स्मिता वर्मा और अगास संस्था के कोषाध्यक्ष नीतीश भी सम्मेलन में शामिल हुए। वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ की सामाजिक संरचना में आदिवासी समाज की भूमिका, उसकी सांस्कृतिक परंपराओं और योगदान पर विचार रखे।

कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार राजकुमारी कांगे ने किया। मांझी सैनिक प्रमुख कुंभ देव कांगे और सचिव राजीव उइके ने आयोजन में सहयोग किया।

कंगला मांझी के योगदान को किया याद

सम्मेलन में कंगला मांझी के सामाजिक और जागरण कार्यों के साथ उनके संगठन से जुड़े लोगों के योगदान को भी याद किया गया। वक्ताओं ने राजमाता फुलवा देवी की संगठन क्षमता और कंगला मांझी की बेटी राजकुमारी के लेखन एवं दस्तावेजीकरण के कार्यों का उल्लेख किया।

बघमार गांव को गौरव ग्राम के रूप में विकसित करने और वहां सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़े विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रयासों तथा डोंगरगढ़ में सैनिक विश्राम गृह के लिए स्थान उपलब्ध कराने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के योगदान का भी उल्लेख किया गया।

वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज के इतिहास, उसकी सांस्कृतिक पहचान और विभिन्न सामाजिक आंदोलनों में उसके योगदान पर चर्चा की। कार्यक्रम शाम चार बजे शुरू होकर रात करीब नौ बजे तक चला।

आयोजकों के अनुसार, इससे पहले विश्व आदिवासी दिवस का सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इस वर्ष राजनांदगांव में सम्मेलन आयोजित कर संगठन ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक योगदान को व्यापक मंच देने का प्रयास किया।

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