महानदी कोलफील्ड्स ने बदली कोयला उत्पादन की तस्वीर, तीन साल से 200 मिलियन टन के पार

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1992-93 में 23 मिलियन टन से शुरुआत, अब देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी; 22 हजार नियमित और 27 हजार से अधिक संविदा कर्मचारी जुड़े

नई दिल्ली, 8 सितंबर, वाय के न्यूज़। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) ने देश के कोयला क्षेत्र में उत्पादन का नया पैमाना स्थापित किया है। 1992-93 में 23 मिलियन टन उत्पादन से शुरू हुई कंपनी अब लगातार तीन वर्षों से 200 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन और प्रेषण कर रही है। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच कंपनी की उत्पादन वृद्धि दर करीब 9 प्रतिशत सीएजीआर रही, जबकि 1992-93 से 2020-21 के बीच यह 6.7 प्रतिशत थी।

कोयला मंत्रालय के अनुसार MCL की यह वृद्धि केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कंपनी ने खदानों के आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक्स, रेल परिवहन, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी, तकनीक और डिजिटल निगरानी के जरिए कोयले की निकासी और आपूर्ति व्यवस्था में भी बदलाव किया है।

23 मिलियन टन से 200 मिलियन टन से ज्यादा

MCL की शुरुआत तालचर और आईबी वैली कोलफील्ड में खनन गतिविधियों के संचालन के लिए हुई थी। आज कंपनी ओडिशा के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में सक्रिय है।

2023-24 में MCL ने पहली बार 200 मिलियन टन का आंकड़ा पार किया था। 2025-26 में भी कंपनी ने 200 मिलियन टन से अधिक उत्पादन किया। इस तरह 200 मिलियन टन का स्तर लगातार बना हुआ उत्पादन पैमाना बन गया है।

99 प्रतिशत से ज्यादा उत्पादन सरफेस माइनर से

MCL के अनुसार अब उसका 99 प्रतिशत से अधिक कोयला उत्पादन सरफेस माइनर तकनीक से होता है। इस तकनीक से पारंपरिक ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग पर निर्भरता कम होती है। मंत्रालय का दावा है कि इससे धूल और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी मदद मिली है।

कंपनी ने खदान से कोयला उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी की 19 परियोजनाओं पर करीब 10,000 करोड़ रुपए, रेल अवसंरचना पर करीब 6,500 करोड़ रुपए और कंक्रीट आंतरिक परिवहन सड़कों तथा कोयला गलियारों पर करीब 2,150 करोड़ रुपए के निवेश की जानकारी दी है।

70 प्रतिशत माल ढुलाई रेल से

MCL के अनुसार करीब 70 प्रतिशत माल ढुलाई रेल के जरिए की जा रही है। रेल-समुद्र-रेल यानी RSR मॉडल के जरिए तटीय क्षेत्रों के उपभोक्ताओं तक कोयला पहुंचाने की व्यवस्था भी विकसित की गई है।

49 हजार से ज्यादा कर्मचारी और श्रमिक

कंपनी के अनुसार उसके यहां 22,000 से अधिक नियमित और 27,000 से अधिक संविदा कर्मचारी हैं। कोयला लोडिंग, परिवहन और इससे जुड़ी गतिविधियों में भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।

तालचर में 500 करोड़ रुपए का मेडिकल कॉलेज

MCL के अनुसार तालचर में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निर्माण में करीब 500 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इसके संचालन के लिए करीब 60 से 80 करोड़ रुपए की वार्षिक वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।

झारसुगुड़ा में सरकारी हृदय रोग अस्पताल, पाइपलाइन आधारित पेयजल परियोजनाएं, एम्स भुवनेश्वर और बुर्ला मेडिकल कॉलेज को सहायता, स्कूल, स्मार्ट क्लास, छात्रावास और खेल परिसरों को भी कंपनी ने अपने सामाजिक निवेश का हिस्सा बताया है।

16 राज्यों तक पहुंची कोयला आपूर्ति

MCL के अनुसार उसकी कोयला आपूर्ति 16 राज्यों में बिजली कंपनियों, कैप्टिव और स्वतंत्र बिजली संयंत्रों, सीमेंट, स्पंज आयरन तथा अन्य औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचती है।

इस लिहाज से महानदी कोलफील्ड्स का उत्पादन ओडिशा के खनन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों के लिए कोयले की उपलब्धता बनाए रखने में कंपनी की भूमिका राष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी है।

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