धीरेंद्र शास्त्री के मांसाहार वाले बयान पर बंगाल में सियासी विरोध

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कांग्रेस ने दो थानों में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा- बंगालियों के खान-पान का फैसला कोई बाहर से नहीं कर सकता

कोलकाता, 8 सितंबर, वाय के न्यूज़। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से परहेज करने की अपील को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने शास्त्री के खिलाफ पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है, जबकि पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने उनकी अपील को खारिज करते हुए कहा है कि बंगालियों के खान-पान और पहनावे का फैसला कोई बाहर से आकर नहीं कर सकता।

दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी ने भवानीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। प्रभात खबर के अनुसार, मध्य कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से भी अलग शिकायत दी गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शास्त्री की टिप्पणी से बंगाली समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। शिकायत में पुलिस से प्राथमिकी दर्ज करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी बयान से बनाई दूरी

विवाद के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शास्त्री के बयान को पार्टी की राय से अलग बताया। उन्होंने कहा कि शास्त्री को शाकाहार की अपील करने का अधिकार है, लेकिन उनके विचार बंगाली समाज पर थोपे नहीं जा सकते।

भट्टाचार्य ने बंगाल की पारंपरिक खान-पान संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि अष्टमी पर लुची और नवमी पर मांस खाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बंगाली मछली और मांस खाना छोड़ देंगे।

दिलीप घोष ने भी परंपरा का हवाला दिया

भाजपा नेता दिलीप घोष ने भी शास्त्री की अपील से अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बंगाल में देवी-देवताओं को मांस की बलि और भोग की परंपरा पुरानी है और कई स्थानों पर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

क्या कहा था धीरेंद्र शास्त्री ने?

हाल में हावड़ा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों से मछली और मांस से परहेज करने की अपील की थी। उन्होंने पूजा के दौरान मांसाहार करने वालों को ‘पाखंडी’ कहा था। इसी टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने पुलिस शिकायत की और भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने भी सार्वजनिक रूप से उनकी अपील से असहमति जताई।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में कांग्रेस की पुलिस शिकायत की पुष्टि है; पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है। इसलिए खबर में इसे ‘FIR दर्ज’ के बजाय ‘पुलिस शिकायत’ लिखना अधिक तथ्यपरक होगा।

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