भोपाल–जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और जबलपुर–मंडला–छत्तीसगढ़ सीमा 6-लेन कॉरिडोर की घोषणा; पूरा होने पर 6–7 घंटे में पहुंचने का दावा
भोपाल/रायपुर, 11 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सड़क संपर्क को नई रफ्तार देने वाली दो बड़ी परियोजनाओं को मध्यप्रदेश सरकार की ओर से मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें भोपाल–जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और जबलपुर–मंडला–छत्तीसगढ़ सीमा तक 6-लेन मार्ग शामिल हैं। दोनों परियोजनाओं के लिए करीब 15 हजार करोड़ रुपये का बजट बताया गया है।
प्रस्तावित सड़क नेटवर्क से भोपाल से सागर, दमोह और जबलपुर होते हुए मंडला तथा छत्तीसगढ़ सीमा तक तेज कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है। इसके आगे छत्तीसगढ़ के रास्ते रायपुर से संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
भोपाल–जबलपुर दूरी 255 किमी होने का दावा
परियोजना से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार नया ग्रीनफील्ड मार्ग बनने के बाद भोपाल और जबलपुर के बीच सड़क दूरी मौजूदा करीब 320 किलोमीटर से घटकर 255 किलोमीटर रह सकती है। यात्रा समय भी मौजूदा 6–7 घंटे से घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे होने का अनुमान है।
इसी तरह जबलपुर से मंडला होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा तक सड़क संपर्क के उन्नयन से जबलपुर और रायपुर के बीच यात्रा समय मौजूदा 7–8 घंटे से घटकर करीब 3.5–4 घंटे होने का दावा किया गया है। इन दोनों हिस्सों के विकसित होने के बाद भोपाल–रायपुर यात्रा को करीब 6–7 घंटे में पूरा करने का अनुमान लगाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के लिए क्या होगा फायदा?
प्रस्तावित कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जबलपुर से मंडला और चिल्पी घाट होते हुए राज्य की सीमा तक बेहतर सड़क संपर्क बनने से रायपुर की ओर आने-जाने वाले यातायात को फायदा होगा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जबलपुर से छत्तीसगढ़ सीमा तक के हिस्से को करीब 2,500 करोड़ रुपये की लागत से 6-लेन में अपग्रेड करने की योजना बताई गई है।
इससे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच यात्री परिवहन के साथ माल ढुलाई, व्यापार और पर्यटन को भी लाभ मिलने की संभावना है।
एक महत्वपूर्ण तथ्य
हालांकि इस परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। 14 मई 2026 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जबलपुर–मंडला–चिल्पी NH-30 के करीब 160 किलोमीटर हिस्से को मौजूदा 2-लेन से 4-लेन कॉरिडोर में विकसित करने के लिए DPR तैयार करने की जानकारी दी थी। उस समय DPR को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था।
वहीं 11 अगस्त की नई मीडिया रिपोर्टों में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से इसी दिशा में 6-लेन मार्ग को मंजूरी दिए जाने की बात कही गई है।
कान्हा क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी होगी बेहतर
मई में जारी केंद्र सरकार की जानकारी के मुताबिक जबलपुर–मंडला–चिल्पी NH-30 परियोजना प्रयागराज–जबलपुर–रायपुर कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रस्तावित फोरलेन परियोजना में नाग घाट, भवाल घाट और चिल्पी घाट जैसे पहाड़ी हिस्सों में सड़क सुरक्षा और आधुनिक इंजीनियरिंग समाधान पर जोर दिया जाना है। यह मार्ग कान्हा टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र से भी गुजरता है, इसलिए वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष संरचनात्मक प्रावधान प्रस्तावित हैं।
रफ्तार के साथ बदलेगा क्षेत्रीय संपर्क
परियोजनाओं के पूरा होने पर भोपाल, सागर, दमोह, जबलपुर और मंडला के बीच सड़क संपर्क मजबूत होगा। दूसरी ओर चिल्पी के रास्ते छत्तीसगढ़ से जुड़ाव बेहतर होने से रायपुर और मध्यप्रदेश के बीच आवागमन का नया तेज मार्ग विकसित होने की उम्मीद है।
