लाइव ट्रैकिंग, एकीकृत टिकटिंग और डिजिटल परमिट व्यवस्था के साथ बस टर्मिनलों के लिए अलग प्राधिकरण का सुझाव
नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026। देश में बस परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, डिजिटल, टिकाऊ और यात्री-केंद्रित बनाने के लिए संसदीय स्थायी समिति ने व्यापक बदलावों की सिफारिश की है। परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी विभाग की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 392वीं रिपोर्ट में नेशनल बस डिजिटल ग्रिड, सार्वजनिक और निजी बसों की लाइव ट्रैकिंग, एकीकृत टिकटिंग तथा बस टर्मिनलों के लिए अलग राष्ट्रीय प्राधिकरण बनाने सहित कई सुझाव दिए हैं।
राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा की अध्यक्षता वाली समिति ने यह रिपोर्ट 6 अगस्त को अंगीकृत की और 11 अगस्त को संसद में प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बस परिवहन को लेकर नीति, नियमन, सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और सार्वजनिक-निजी भागीदारी से जुड़े कई सुधारों का प्रस्ताव रखा गया है।
ऑल इंडिया पैसेंजर परमिट की सिफारिश
समिति ने मौजूदा ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की जगह एक वर्ष के भीतर ऑल इंडिया पैसेंजर परमिट लागू करने की सिफारिश की है। इसके तहत वाहन, FASTag और वाहन के स्थान संबंधी डेटा को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जोड़े जाने का सुझाव है।
समिति ने ऐसे परमिट की व्यवस्था में अधिकारों और शर्तों को स्पष्ट करने, निगरानी केंद्र स्थापित करने तथा अभी भी मौजूद छह राज्यों की सीमा चौकियों को समाप्त करने का सुझाव दिया है। घायल यात्रियों के बीमा दावों को भी अधिक सरल और विवादमुक्त बनाने की बात कही गई है।
देशभर में एक डिजिटल बस नेटवर्क
रिपोर्ट का प्रमुख सुझाव नेशनल बस डिजिटल ग्रिड है। समिति ने एक वर्ष के भीतर इसके लिए अंतरसंचालनीयता के मानक तय करने की सिफारिश की है।
इसके तहत सार्वजनिक और निजी बस ऑपरेटरों को एक डिजिटल व्यवस्था से जोड़कर लाइव बस ट्रैकिंग और एकीकृत बुकिंग की सुविधा विकसित करने का प्रस्ताव है। परमिट डेटाबेस से जुड़ी यात्री रेटिंग व्यवस्था और बसों तथा टर्मिनलों की स्थिति की समयबद्ध, भू-टैग की गई रिपोर्टिंग का भी सुझाव दिया गया है।
वाहन ट्रैकिंग और टोल डेटा के आधार पर समयबद्धता, पूर्वानुमान तथा जोखिम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए GIS आधारित नेटवर्क एटलस बनाने की सिफारिश भी की गई है।
बस टर्मिनलों के लिए अलग प्राधिकरण
समिति ने बस संचालन और बस टर्मिनलों के स्वामित्व को अलग करने की सिफारिश की है। इसके लिए हवाईअड्डा प्राधिकरण की तर्ज पर राष्ट्रीय बस टर्मिनल प्राधिकरण गठित करने का सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट में एक वर्ष के भीतर बस टर्मिनलों के लिए राष्ट्रीय स्तर की संहिता तैयार करने तथा गुरुग्राम और कटरा जैसे टर्मिनलों को मॉडल के रूप में विकसित करने की बात कही गई है। मानक बस स्टॉप के लिए भी राष्ट्रीय मानक निर्धारित करने की सिफारिश है।
सुरक्षा जांच को और सख्त करने का सुझाव
समिति ने बसों की सुरक्षा को लेकर भी कई सुझाव दिए हैं। छह महीने के भीतर स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्रों के लिए जिलावार योजना तैयार करने तथा प्रत्येक फिटनेस परीक्षण में अग्नि सुरक्षा, आपात निकास और चेतावनी उपकरणों की जांच सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
स्लीपर और स्कूल बसों में आवश्यक सुरक्षा सुधारों की जांच तथा परमिट नवीनीकरण के दौरान ऑपरेटर की प्रकाशित सुरक्षा रेटिंग को ध्यान में रखने का सुझाव भी दिया गया है। समिति ने एक वर्ष के भीतर आपातकालीन चेतावनी प्रणाली को प्रभावी बनाने की सिफारिश की है।
इलेक्ट्रिक बसों की ओर बढ़ने का सुझाव
रिपोर्ट में बस बेड़े के चरणबद्ध विद्युतीकरण पर भी जोर दिया गया है। समिति ने ऑपरेटरों को स्क्रैपिंग सुविधाओं के माध्यम से पुरानी बसों को हटाकर नई बसों के संचालन की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया है।
इलेक्ट्रिक बसों की थोक खरीद, बसों के संचालन क्षेत्र के अनुसार चार्जिंग व्यवस्था तथा इलेक्ट्रिक बसों और बैटरियों के लिए एंड-ऑफ-लाइफ फ्रेमवर्क बनाने की सिफारिश की गई है। क्षेत्रीय विनिर्माण, परीक्षण और रखरखाव क्लस्टर विकसित करने का भी सुझाव है।
महिलाओं के लिए महिला संचालित बस सेवाएं
समिति ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यस्त समय में महिला चालकों और महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित बस सेवाओं का कार्यक्रम शुरू करने की सिफारिश की है।
नई बसों में CCTV, अलर्ट सिस्टम तथा बसों में शौचालयों के मानकीकरण की दिशा में भी कदम उठाने का सुझाव दिया गया है। रात्रिकालीन ठहराव स्थलों पर स्वच्छता की निगरानी और समावेशी परिवहन के लिए वित्तीय व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है।
पर्यटन को परिवहन से जोड़ने का प्रस्ताव
समिति ने राष्ट्रीय पर्यटक बस ग्रिड विकसित करने का सुझाव दिया है। इसके तहत बस, रेल, मेट्रो, हवाई और जल परिवहन को एकीकृत टिकट व्यवस्था के जरिए जोड़ने की परिकल्पना की गई है।
प्रमुख पर्यटन स्थलों पर इंटरमॉडल हब विकसित करने, पर्यटक केंद्रित बस टर्मिनल मानक तय करने तथा यात्रियों की संतुष्टि के सर्वेक्षण सार्वजनिक करने की भी सिफारिश की गई है।
राज्यों की होगी रैंकिंग
समिति ने बस परिवहन सुविधा के आधार पर राज्यों की वार्षिक रैंकिंग प्रकाशित करने का सुझाव दिया है। इसमें वाहन परीक्षण की उपलब्धता, टर्मिनलों तक पहुंच, आपातकालीन प्रणालियों की कार्यशीलता, नेटवर्क की समयबद्धता, यात्रियों और ऑपरेटरों की प्रतिक्रिया तथा नागरिक शिकायतों के निपटारे जैसे मानकों को शामिल करने की बात कही गई है।
यात्रियों की संख्या का राष्ट्रीय आंकड़ा
रिपोर्ट में देश में बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या का नियमित आधिकारिक अनुमान जारी करने की भी सिफारिश की गई है। इसके लिए राज्यों के अलग-अलग डेटा सिस्टम को एकीकृत राष्ट्रीय डेटा ढांचे से जोड़ने का सुझाव दिया गया है।
समिति ने छह महीने के भीतर बस बेड़े के आंकड़ों का मिलान करने और देश में बसों की सभी श्रेणियों का एक समेकित विवरण तैयार करने की सिफारिश भी की है।
महत्वपूर्ण: ये संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशें हैं। इन्हें सरकार द्वारा लागू किए गए निर्णय या नई व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इनके क्रियान्वयन के लिए संबंधित मंत्रालय और सरकार की ओर से आगे निर्णय एवं कार्रवाई आवश्यक होगी।
