भिक्षावृत्ति में लगे 10,446 लोगों का पुनर्वास, 2,824 बच्चे भी शामिल

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

स्माइल योजना के तहत अब तक 45.59 करोड़ रुपये जारी, लोगों को प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की कोशिश

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026। केंद्र सरकार की स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना के तहत देशभर में अब तक 10,446 लोगों का पुनर्वास किया गया है। इनमें 2,824 बच्चे और 7,622 वयस्क शामिल हैं। योजना शुरू होने से 31 जुलाई 2026 तक सरकार ने इसके लिए 45.59 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री बी.एल. वर्मा ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना 23 अक्टूबर 2023 को शुरू की गई थी।

40 करोड़ रुपये से ज्यादा राज्यों और शहरों को मिले

सरकार के मुताबिक, जारी 45.59 करोड़ रुपये में से 40.04 करोड़ रुपये राज्यों में योजना लागू करने वाली एजेंसियों और शहरों को दिए गए हैं। बाकी राशि का इस्तेमाल योजना से जुड़े प्रशासनिक और अन्य खर्चों में किया गया है।

योजना के तहत भिक्षावृत्ति में लगे लोगों को सिर्फ आश्रय देने के बजाय उन्हें कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और अपना काम शुरू करने में मदद देने की व्यवस्था की गई है।

बच्चों को पढ़ाई और परिवार से मिलाने पर जोर

योजना के तहत बचाए गए बच्चों की उम्र के हिसाब से देखभाल, पढ़ाई और काउंसलिंग की जाती है। कोशिश की जाती है कि उन्हें उनके परिवार से फिर मिलाया जा सके।

सरकार के अनुसार, बच्चों को रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण के लिए शामिल नहीं किया जाता। वयस्कों को उनकी उम्र, रुचि, स्वास्थ्य और आसपास उपलब्ध काम के हिसाब से प्रशिक्षण दिया जाता है।

कई तरह के काम सिखाए जा रहे

लाभार्थियों को बढ़ई का काम, सिलाई, घर की साफ-सफाई और देखभाल, सफाई सेवाएं, बाल काटना, सुरक्षा सेवाएं, खाना बनाना, बागवानी और ई-रिक्शा चलाना जैसे काम सिखाए जा रहे हैं।

इसके अलावा लोगों को समूह बनाकर काम करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है। उन्हें बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थाओं से जोड़कर अपना छोटा कारोबार शुरू करने में मदद दी जाती है।

इनमें टिफिन स्टॉल, खाने-पीने के ठेले, सब्जी की दुकान और मसाले, अचार, नमकीन व पापड़ बनाने जैसे काम शामिल हैं।

तमिलनाडु में सबसे ज्यादा वयस्कों का पुनर्वास

सरकार की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वयस्कों के पुनर्वास के मामले में तमिलनाडु 1,557 लोगों के साथ सबसे आगे है।

इसके बाद मध्य प्रदेश में 1,135, उत्तर प्रदेश में 884, महाराष्ट्र में 817, असम में 472, आंध्र प्रदेश में 466, जम्मू-कश्मीर में 434 और केरल में 418 वयस्कों का पुनर्वास किया गया है।

आश्रय गृहों की हर दो साल में जांच

सरकार ने भिक्षावृत्ति में लगे लोगों के लिए बनाए गए आश्रय गृहों की व्यवस्था बेहतर करने के लिए नए दिशानिर्देश भी बनाए हैं।

इनके तहत हर आश्रय गृह की कम से कम दो साल में एक बार बाहरी एजेंसी से जांच कराई जाएगी। इसमें भवन की सुरक्षा, बिजली, पानी, सफाई, दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए सुविधाओं तथा वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा की जांच होगी।

अगर जांच में कोई कमी मिलती है तो उसे दूर कराने की जिम्मेदारी संबंधित जिला अधिकारी या नामित अधिकारी की होगी।

मोबाइल एप से होगी निगरानी

सरकार ने भिक्षावृत्ति में लगे लोगों की पहचान और उनके पुनर्वास की जानकारी जुटाने के लिए एक मोबाइल एप भी तैयार किया है।

इसमें लोगों की पहचान, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण, पुनर्वास, आश्रय गृह से बाहर आने, परिवार से दोबारा मिलने और बाद में उनकी स्थिति की जानकारी दर्ज की जा सकेगी।

सरकार का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि योजना का लाभ किसे मिला और पुनर्वास के बाद उसकी स्थिति क्या है।

सम्मान के साथ जीवन देने पर जोर

सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भिक्षावृत्ति में लगे लोगों और आश्रय गृहों के लिए नए दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं। इन्हें 13 अप्रैल 2026 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजा गया।

इन दिशानिर्देशों में आश्रय गृहों में रहने वालों के लिए स्वास्थ्य, सफाई, भोजन, कानूनी मदद, बच्चों की सुरक्षा, प्रशिक्षण और निगरानी जैसी व्यवस्थाओं के न्यूनतम मानक तय किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि योजना का मकसद भिक्षावृत्ति में लगे लोगों को केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें कौशल, रोजगार और परिवार-समाज से दोबारा जोड़कर सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देना है।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर