ब्लू वाटर में नीली मौतें: जवाबदेही किसकी?

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9 साल में 9 मौतें, अब 24 वर्षीय युवक डूबा; 2025 में दो छात्रों की मौत के बाद फेंसिंग के प्रस्ताव की बात सामने आई थी

रायपुर, 21 अगस्त। वाय के न्यूज। रायपुर के माना थाना क्षेत्र के नकटी स्थित ब्लू वाटर खदान में डूबने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बुधवार शाम यहां 24 वर्षीय आदिल खान दोस्तों के साथ पहुंचा था। एक छोर से दूसरे छोर तक तैरकर जाने की शर्त के दौरान वह गहरे पानी में चला गया और लापता हो गया। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) ने गुरुवार सुबह तलाशी अभियान शुरू किया, लेकिन पानी की अधिक गहराई के कारण देर तक उसका पता नहीं चल सका। उपलब्ध रिपोर्टों में अभी उसके शव की बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ब्लू वाटर में यह कोई पहली घटना नहीं है। उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार 2017 से अब तक यहां डूबने से 9 लोगों की मौत हो चुकी है। आदिल के मामले में मौत की पुष्टि होने पर यह संख्या 10 हो जाएगी। यह आंकड़ा उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों से तैयार हुआ है; 2017 से अब तक का कोई समेकित आधिकारिक पुलिस या जिला प्रशासनिक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

2025 में दो छात्रों की मौत के बाद उठा था सुरक्षा का सवाल

31 अक्टूबर 2025 को ब्लू वाटर खदान में कक्षा 10 के छात्र जयेश साहू और मृदुल बंजारिया डूब गए थे। दोनों अपने तीन-चार साथियों के साथ वहां पहुंचे थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें गहरे पानी में जाने से चेताया था। इसके बावजूद दोनों पानी में उतर गए। करीब पांच घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद भी तत्काल शव नहीं मिले थे। बाद में दोनों के शव बरामद किए गए।

उस हादसे के बाद सामने आई जानकारी में खदान की सुरक्षा और वहां लोगों के पहुंचने पर रोक का सवाल उठा था। पुलिस के हवाले से यह भी बताया गया था कि खदान में पहले ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं और फेंसिंग के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि उस प्रस्ताव की मूल प्रति, उसकी तारीख और उस पर हुई सरकारी कार्रवाई का दस्तावेज अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

यही बिंदु मौजूदा हादसे के बाद सबसे अहम हो जाता है—अगर फेंसिंग का प्रस्ताव भेजा गया था तो उस पर आगे क्या हुआ?

2023 में एक ही हादसे में तीन युवकों की मौत

11 जून 2023 को ब्लू वाटर में नहाने उतरे चार युवकों में से तीन की डूबने से मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान मोहम्मद नदीम अंसारी, फैजल आजम और शाहबाज अंसारी के रूप में हुई थी। चौथा युवक बच गया था। घटना के बाद पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) ने तलाशी अभियान चलाया और शव बरामद किए।

अगले वर्ष प्रकाशित एक रिपोर्ट में ब्लू वाटर को रायपुर के उन जलस्थलों में शामिल किया गया था जहां डूबने की घटनाएं होती रही हैं। रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया था कि ऐसे स्थानों पर खतरे और पानी की गहराई से संबंधित संकेतक नहीं लगाए गए हैं।

हादसों का सिलसिला

उपलब्ध रिपोर्टों में ब्लू वाटर में 2017 से लगातार डूबने की घटनाओं का उल्लेख मिलता है। हालिया घटनाक्रम में दर्ज आंकड़ा इस प्रकार है—

  • 2017: 17 वर्षीय सुनैना की डूबने से मौत का उल्लेख।
  • मई 2019: 17 वर्षीय मोहन बाघ की डूबने से मौत का उल्लेख।
  • मार्च 2023: दो युवकों की डूबने से मौत का उल्लेख।
  • जून 2023: एक ही घटना में तीन युवकों की मौत।
  • अक्टूबर 2025: दो स्कूली छात्रों जयेश साहू और मृदुल बंजारिया की मौत।
  • अगस्त 2026: आदिल खान गहरे पानी में डूबकर लापता; तलाश जारी।

इन घटनाओं को जोड़ने पर 2026 की घटना से पहले 9 मौतों का आंकड़ा सामने आता है। हालांकि 2017, 2019 और मार्च 2023 की घटनाओं के लिए स्वतंत्र पुलिस रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण इन पुराने मामलों को आधिकारिक सरकारी आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा।

जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की या लोगों की भी?

ब्लू वाटर में हुए हादसों में लोगों के जोखिम उठाने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। 2023 में युवक नहाने के लिए पानी में उतरे थे, जबकि 2025 में स्थानीय लोगों द्वारा छात्रों को चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई थी। मौजूदा घटना में भी दोस्तों के बीच तैरकर खदान पार करने की शर्त लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।

लेकिन दूसरी ओर, लगातार हादसों के बावजूद स्थायी सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश रोकने, चेतावनी संकेतक और फेंसिंग जैसे उपायों पर क्या कार्रवाई हुई, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।

खासकर इसलिए क्योंकि 2025 के हादसे के बाद फेंसिंग के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की बात सामने आई थी। एक साल बाद उसी खदान में फिर युवक के डूबने की घटना ने उस प्रस्ताव की स्थिति पर सवाल खड़ा कर दिया है।

अब सामने आने चाहिए ये दस्तावेज

ब्लू वाटर की जवाबदेही तय करने के लिए 2017 से अब तक के माना थाना के मर्ग और पुलिस रिकॉर्ड, 2025 के फेंसिंग प्रस्ताव की मूल प्रति, संबंधित विभाग की फाइल नोटिंग, खदान की वर्तमान स्वामित्व या लीज स्थिति, सुरक्षा संबंधी आदेश और मौके पर लगाए गए चेतावनी बोर्ड अथवा घेराबंदी से संबंधित रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।

फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से इतना स्पष्ट है कि ब्लू वाटर में 2017 से अब तक कम से कम नौ मौतों का मीडिया-आधारित रिकॉर्ड सामने आता है। 2025 में दो छात्रों की मौत के बाद फेंसिंग के प्रस्ताव की जानकारी सामने आई थी और अगस्त 2026 में फिर एक युवक गहरे पानी में डूब गया। अब सवाल यह है कि प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई हुई और ब्लू वाटर को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

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