पटना, 18 अगस्त। वाय के न्यूज। बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित बर्बरता से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर पुलिस की ओर से जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग से इनकार किया है। हालांकि, हलफनामे में सरकार ने स्वीकार किया है कि सिवान में एक कांस्टेबल ने भीड़ में फंसने के बाद अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए थे। सरकार के अनुसार इन गोलियों से कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ।
सरकार के अनुसार यह घटना 25 जुलाई को सिवान में प्रदर्शन के दौरान हुई। प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से जेपी चौक की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस के मुताबिक दोपहर करीब 12:30 बजे प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव शुरू हुआ। पुलिस के 20 जवान घायल हुए और दो पुलिस वाहन तथा कई ट्रैफिक ट्रॉलियां क्षतिग्रस्त हुईं। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
हाथी चौक पर पिस्तौल से फायरिंग
हलफनामे में सिवान के हाथी चौक की घटना का भी उल्लेख है। सरकार के मुताबिक वहां भीड़ को तितर-बितर करने के लिए एक सहायक उपनिरीक्षक ने अपनी 9 एमएम पिस्तौल से दो राउंड फायर किए। इस दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली आग्नेयास्त्र चोटें आईं। उन्हें पहले सिवान सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया। सरकार के अनुसार इलाज के बाद तीनों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये तीनों प्रदर्शनकारी AK-47 से घायल नहीं हुए थे और उस स्थान पर भी मौजूद नहीं थे, जहां कांस्टेबल ने AK-47 से फायर किया था। गोली किस हथियार से चली, कितनी दूरी से चली और फायरिंग का कोण क्या था, यह पता लगाने के लिए बैलिस्टिक जांच जारी है।
AK-47 के इस्तेमाल पर पुलिसकर्मी निलंबित
सरकार ने हलफनामे में कहा है कि AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए किया जाता है, कानून-व्यवस्था की सामान्य स्थिति से निपटने के लिए नहीं। AK-47 से फायरिंग करने वाले कांस्टेबल को निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बिहार के पुलिस महानिदेशक ने AK-47 के इस्तेमाल को लेकर एक विस्तृत निर्देश भी जारी किया है।
69 एफआईआर, 500 गिरफ्तारियां
हलफनामे के अनुसार 22 से 25 जुलाई के बीच बिहार में छात्र प्रदर्शनों के सिलसिले में कुल 69 एफआईआर दर्ज की गईं और 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया। किशोर न्याय बोर्ड ने 75 नाबालिगों को भी रिहा किया।
सरकार ने कहा है कि पुलिस ने उन प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चों को भी, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, साधारण बॉन्ड पर रिहा किया गया।
पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी दावा
राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि बिहार के कई हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गया था। सरकार के अनुसार गांधी मैदान, जहानाबाद, पटना, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सिवान में हिंसा हुई। प्रदर्शन के दौरान 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए।
सरकार ने यह भी कहा है कि छपरा में प्रदर्शन के दौरान दो प्रखंड विकास पदाधिकारी, तीन पुलिस निरीक्षक, दो अवर निरीक्षक और 11 कांस्टेबल घायल हुए। एक बीडीओ की आंख जाने और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने का दावा भी हलफनामे में किया गया है।
वीडियो और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को प्रदर्शन से जुड़े सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा गया है। सरकार ने यह भी कहा है कि प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर जारी नहीं किया जाएगा।
सिवान में AK-47 चलाने वाले कांस्टेबल को निलंबित किए जाने की जानकारी पहले भी सामने आ चुकी थी। अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे से पहली बार घटना का राज्य सरकार का विस्तृत पक्ष सामने आया है।
