CIL का दैनिक उत्पादन 35% बढ़कर 1.83 मिलियन टन; बिजली क्षेत्र को आपूर्ति भी 24% बढ़ी
रायपुर, 7 सितंबर, वाय के न्यूज। मानसून की बारिश में कमी आते ही कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की खदानों में उत्पादन और कोयला आपूर्ति ने तेजी पकड़ ली है। इसका असर छत्तीसगढ़ की साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) पर भी दिखाई दिया है। सितंबर के शुरुआती बारिश प्रभावित दिनों की तुलना में 6 सितंबर तक SECL का औसत दैनिक कोयला उत्पादन 33 प्रतिशत बढ़कर 0.15 मिलियन टन से 0.20 मिलियन टन हो गया।
कोयला मंत्रालय के अनुसार CIL का औसत दैनिक उत्पादन सितंबर के पहले तीन बारिश प्रभावित दिनों में करीब 1.36 मिलियन टन था, जो 6 सितंबर को बढ़कर 1.83 मिलियन टन हो गया। यानी उत्पादन में करीब 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
बिजली संयंत्रों को भी ज्यादा कोयला
उत्पादन बढ़ने के साथ बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति भी तेज हुई है। सितंबर के पहले तीन दिनों में बिजली क्षेत्र को CIL की औसत दैनिक आपूर्ति करीब 1.37 मिलियन टन थी, जो 6 सितंबर तक बढ़कर 1.70 मिलियन टन हो गई। यह करीब 24 प्रतिशत की वृद्धि है।
SECL से बिजली क्षेत्र को होने वाली औसत दैनिक आपूर्ति भी 0.30 मिलियन टन से बढ़कर 0.37 मिलियन टन हो गई। इसमें करीब 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं CIL की नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) में बिजली क्षेत्र को आपूर्ति 56 प्रतिशत बढ़कर 0.18 से 0.28 मिलियन टन हो गई।
ओवरबर्डन हटाने में भी तेजी
कोयला उत्पादन बढ़ाने के साथ खदानों में ओवरबर्डन रिमूवल (OBR) का काम भी तेज किया गया है। कोयला निकालने से पहले ऊपर की मिट्टी और चट्टानी परत हटाने की प्रक्रिया को OBR कहा जाता है। यह भविष्य के उत्पादन की तैयारी का महत्वपूर्ण संकेतक है।
CIL में औसत दैनिक OBR सितंबर के शुरुआती तीन दिनों में 2.5 मिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 6 सितंबर को 5.1 मिलियन क्यूबिक मीटर हो गया। मंत्रालय के मुताबिक SECL में OBR में करीब चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
सूखी खदानों से बढ़ेगा उत्पादन
बारिश के दौरान प्रभावित खदानों में अब कामकाज की परिस्थितियां सुधर रही हैं। निचली कोयला सीमों को लगातार डी-वाटरिंग के जरिए फिर से संचालन में लाया जा रहा है। सूखे वर्किंग बेंच और अपेक्षाकृत कम नमी वाला रॉ कोल उपलब्ध होने से खनन और परिवहन प्रक्रिया भी सुचारू होने लगी है।
भारी बारिश से प्रभावित सड़कों और कोयला परिवहन मार्गों को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार 3 सितंबर के बाद बारिश में कमी आने के साथ इन उपायों का असर उत्पादन और कोयला आवाजाही में दिखाई देने लगा है।
रोड मोड से भी बढ़ेगी आपूर्ति
CIL बिजली संयंत्रों, खासकर वाशरी और रेक-कम-रोड (RCR) मोड से कोयला लेने वाले संयंत्रों को आपूर्ति मजबूत करने के लिए अतिरिक्त उपाय कर रही है। केंद्रीय और राज्य बिजली उत्पादन कंपनियों तथा स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (IPP) को रोड मोड से उठाव के लिए मासिक निर्धारित मात्रा (MSQ) से अधिक कोयला देने की पेशकश की जा रही है।
मंत्रालय के मुताबिक रोड मोड में महत्वपूर्ण बिजली संयंत्रों को जारी वितरण आदेशों के मुकाबले कोयले की लिफ्टिंग को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
बारिश कम होने के बाद उत्पादन, ओवरबर्डन हटाने और बिजली क्षेत्र को आपूर्ति—तीनों मोर्चों पर तेजी आई है। कोयला मंत्रालय का कहना है कि सितंबर में जारी यह सुधार CIL के उत्पादन और डिस्पैच के लिए सकारात्मक संकेत है और बिजली संयंत्रों को आपूर्ति धीरे-धीरे मानसून से पहले के स्तर की ओर बढ़ रही है।
