स्टार्टअप और एमएसएमई को 5 करोड़ तक, उन्नत चरण की परियोजनाओं के लिए 100 करोड़ तक मदद
नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026। फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में नए उत्पाद और तकनीक विकसित करने वाले स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और उद्योगों के लिए केंद्र सरकार ने एक और मौका दिया है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग ने फार्मा एवं मेडटेक में अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन (पीआरआईपी) योजना के तहत आवेदन की दूसरी प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 5,000 करोड़ रुपये है।
योजना के तहत फार्मा और मेडटेक क्षेत्र की नई तकनीकों को प्रयोगशाला से आगे उत्पाद विकास और व्यावसायीकरण की दिशा में ले जाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। आवेदन दो श्रेणियों में होंगे।
प्रारंभिक चरण में टीआरएल 1, 2 और 3 पर मौजूद उत्पादों या तकनीकों को टीआरएल 5 तक ले जाने वाली स्टार्टअप और एमएसएमई परियोजनाएं पात्र होंगी। इस श्रेणी में प्रति परियोजना 5 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। आवेदन की शुरुआत संक्षिप्त अवधारणा नोट से होगी और चयनित आवेदकों को विस्तृत आवेदन देना होगा।
बाद के चरण में टीआरएल 4, 5 और 6 पर मौजूद तकनीकों को उच्च स्तर तक ले जाने वाली उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई परियोजनाएं आवेदन कर सकेंगी। इस श्रेणी में प्रति परियोजना अधिकतम 100 करोड़ रुपये तक सहायता उपलब्ध होगी। हालांकि यह सहायता स्वीकृत परियोजना लागत के अधिकतम 35 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। बाकी राशि आवेदक को स्वयं सह-वित्तपोषित करनी होगी।
नई दवा से रोबोटिक सर्जरी तक
योजना में नई औषधियां, जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर तथा नवीन चिकित्सा उपकरण प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं। नवीन चिकित्सा उपकरणों में एआई और मशीन लर्निंग आधारित मेडिकल डिवाइस, सॉफ्टवेयर आधारित मेडिकल डिवाइस, आनुवंशिक तकनीक वाले निदान एवं स्क्रीनिंग उपकरण, रोबोटिक सर्जिकल उपकरण, टेलीमेडिसिन सुविधाओं वाले उपकरण और बायोमार्कर आधारित इन-विट्रो डायग्नोस्टिक उपकरण शामिल हैं।
पीआरआईपी पोर्टल पर आवेदन जमा करने की प्रक्रिया सितंबर के मध्य तक शुरू होगी। पहले चरण में किसी परियोजना को जमा कर चुके आवेदकों को वही परियोजना दोबारा जमा नहीं करने को कहा गया है।
2023 में शुरू हुई पीआरआईपी योजना का उद्देश्य देश में फार्मा अनुसंधान एवं विकास का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। इसके तहत विश्वस्तरीय शोध अवसंरचना, प्रशिक्षित मानव संसाधन और अनुसंधान से विकसित उत्पादों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
