राज्यों में कार्रवाई के बाद FSSAI सख्त, असली पनीर और विकल्प के बीच फर्क साफ करने पर जोर
नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026। दूध से बने पनीर के विकल्प के तौर पर वनस्पति तेल और गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किए जाने वाले ‘एनालॉग पनीर’ पर देशभर में कार्रवाई की तैयारी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के CEO राजित पुन्हानी के अनुसार, कई राज्यों में कार्रवाई के बाद अब इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी स्तर पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
एनालॉग पनीर में दूध से प्राप्त सामग्री की जगह गैर-डेयरी घटकों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे उत्पादों को लेकर मुख्य चिंता तब पैदा होती है, जब उन्हें असली पनीर के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की जानकारी नहीं दी जाती।
कई राज्यों में शुरू हो चुकी कार्रवाई
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों में एनालॉग पनीर के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को लेकर कार्रवाई की गई है। पंजाब में इसके उत्पादन, बिक्री और भंडारण पर एक साल की रोक लगाए जाने की रिपोर्ट है। अन्य राज्यों में भी खाद्य सुरक्षा विभागों ने जांच और कार्रवाई की है।
FSSAI अब राज्यों में अलग-अलग कार्रवाई के बजाय इस मामले में देशभर में एक समान नियामकीय व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
होटल-रेस्तरां भी जांच के दायरे में
एनालॉग पनीर का इस्तेमाल होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य कारोबारियों में होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि ऐसे उत्पाद का इस्तेमाल किया जाता है तो खाद्य कारोबारियों के लिए उसकी प्रकृति और पहचान को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कार्रवाई में यह देखा जा रहा है कि उत्पाद में इस्तेमाल सामग्री क्या है और उसे उपभोक्ताओं के सामने किस नाम से प्रस्तुत किया जा रहा है।
‘एनालॉग’ और ‘नकली पनीर’ में फर्क
एनालॉग उत्पाद को सीधे ‘नकली पनीर’ कहना भी तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। FSSAI के मानकों में डेयरी एनालॉग की अलग श्रेणी है। विवाद मुख्य रूप से ऐसे उत्पाद को असली पनीर बताकर बेचने या उसकी वास्तविक संरचना स्पष्ट नहीं करने को लेकर है।
राष्ट्रीय स्तर पर किसी नए प्रतिबंध को लागू करने से पहले संबंधित नियामकीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसलिए फिलहाल देशभर में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लागू होने की बात नहीं कही जा सकती।
यदि राष्ट्रव्यापी रोक लागू होती है तो होटल, रेस्तरां, कैटरिंग इकाइयों और अन्य खाद्य कारोबारियों को इसके निर्माण, उपयोग, भंडारण और बिक्री से जुड़े नए नियमों का पालन करना होगा।
