सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद FSSAI का प्रस्ताव, पैकेट के सामने ही दिखेगी चेतावनी
नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026। पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में ज्यादा चीनी, नमक और संतृप्त वसा की मात्रा अब उपभोक्ताओं से छिपी नहीं रहेगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ऐसे उत्पादों के पैकेट के सामने लाल रंग का षट्भुजाकार चेतावनी चिन्ह लगाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को खरीदारी से पहले ही उत्पाद में मौजूद अधिक मात्रा वाले पोषक तत्वों की जानकारी देना है।
प्रस्तावित चेतावनी में ‘HIGH SUGAR’, ‘HIGH SALT’ और ‘HIGH FAT’ जैसे संकेत स्पष्ट रूप से दिए जाएंगे। यह निशान पैकेट के सामने प्रमुखता से लगाया जाएगा, ताकि उपभोक्ता को जानकारी के लिए पैकेट का पिछला हिस्सा न देखना पड़े।
दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव
FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक व्यवस्था को दो चरणों में लागू किया जा सकता है। पहले चरण में उन पैकेज्ड खाद्य पदार्थों को चेतावनी लेबल के दायरे में लाने का प्रस्ताव है, जिनमें निर्धारित सीमा से दो या अधिक पोषक तत्व ज्यादा हैं।
दूसरे चरण में किसी एक पोषक तत्व की निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा वाले उत्पादों पर भी चेतावनी लगाने का प्रस्ताव है।
कुछ खाद्य पदार्थ दायरे से बाहर
प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ बुनियादी एकल-घटक खाद्य पदार्थों को छूट देने की बात कही गई है। इनमें तेल, घी, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे उत्पाद शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद कदम
फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रहा है। 13 अगस्त को अदालत ने केंद्र को इस संबंध में अपना अंतिम निर्णय रिकॉर्ड पर रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था और स्पष्ट किया था कि कार्रवाई नहीं होने पर आगे निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
अब FSSAI ने अदालत में दाखिल हलफनामे के जरिए लाल चेतावनी लेबल की प्रस्तावित व्यवस्था सामने रखी है। हालांकि यह अभी प्रस्ताव है, अंतिम रूप से लागू नियम नहीं। आगे नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसकी अंतिम व्यवस्था और लागू होने की तारीख स्पष्ट होगी।
इस व्यवस्था का मकसद उपभोक्ताओं को पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की पोषण संबंधी जानकारी सरल और तुरंत दिखाई देने वाले तरीके से उपलब्ध कराना है, ताकि वे खरीदारी का फैसला अधिक जानकारी के साथ कर सकें।
