धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद क्या-क्या हुआ

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पूरे घटनाक्रम का राउंडअप

नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026, वाय के न्यूज।‌केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देशभर में चल रहा छात्र आंदोलन समाप्त हो गया है। जंतर-मंतर पर 49 दिन से जारी धरना खत्म कर दिया गया। हालांकि परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक पर रोक और युवाओं के भरोसे की बहाली को लेकर बहस जारी है। सरकार, आंदोलनकारियों, विपक्ष और विभिन्न नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बीच पूरे घटनाक्रम पर एक नजर।

आंदोलन समाप्त, धरना खत्म

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन समाप्त कर दिया गया। आंदोलनकारियों ने इसे छात्रों और युवाओं के शांतिपूर्ण संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि प्रमुख मांग पूरी होने के बाद आंदोलन वापस लिया जा रहा है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच क्या सहमति बनी?

  • धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया।
  • आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और अन्य कानूनी कार्रवाई वापस लेने पर सहमति बनी।
  • पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने पर सरकार ने सहमति जताई। मुआवजे की प्रक्रिया और राशि नियमानुसार तय की जाएगी।
  • परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने, एनटीए में सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए संस्थागत सुधार जारी रखने का आश्वासन दिया गया।
  • इन आश्वासनों के बाद आंदोलनकारियों ने सद्भावना के आधार पर आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।

आंदोलनकारियों ने क्या कहा?

आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कहा कि यह लोकतांत्रिक तरीके से लड़ी गई लड़ाई की जीत है। उनका कहना था कि सरकार को छात्रों की आवाज सुननी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सहमति के बिंदुओं पर अमल नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में हर जिम्मेदारी निष्ठा, ईमानदारी और पूर्ण समर्पण के साथ निभाई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षा मंत्री के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, तकनीकी एवं उच्च शिक्षा के विस्तार तथा विद्यार्थियों के लिए नए अवसर सृजित करने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए दिया गया उनका इस्तीफा सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों, गरिमा और सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश के युवाओं के शांतिपूर्ण संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा, “मुझे आप सब पर गर्व है।” राहुल गांधी ने कहा कि यह छात्रों की एकजुटता और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत है तथा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब अगला कदम होना चाहिए।

कांग्रेस ने क्या कहा?

कांग्रेस ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के संघर्ष और विपक्ष के दबाव का परिणाम है। पार्टी ने कहा कि केवल इस्तीफा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

सोनम वांगचुक ने क्या कहा?

सोनम वांगचुक ने इसे “लोकतंत्र की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन और युवाओं की एकजुटता ने यह बदलाव संभव किया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार और छात्रों का भरोसा बहाल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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