भारतीय मानक समय को कानूनी दर्जा देने वाले नए नियम अधिसूचित, 180 दिन बाद होंगे लागू
नई दिल्ली, 3 सितंबर, वाय के न्यूज़। केंद्र सरकार ने देश में भारतीय मानक समय (IST) को आधिकारिक और कानूनी समय बनाने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 के लागू होने के बाद देश में सरकारी और जरूरी डिजिटल सेवाओं के लिए एक समान समय व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
ये नियम 27 अगस्त को अधिसूचित और 29 अगस्त को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किए गए थे। राजपत्र में प्रकाशन के 180 दिन बाद ये लागू होंगे।
क्यों जरूरी है एक समान समय?
आज बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, मोबाइल नेटवर्क, बिजली ग्रिड, रेलवे-हवाई परिवहन, डेटा सेंटर और सरकारी ऑनलाइन सेवाएं सटीक समय पर निर्भर हैं। अलग-अलग सिस्टम में समय का थोड़ा अंतर भी लेनदेन और तकनीकी कामकाज में परेशानी पैदा कर सकता है।
साइबर सुरक्षा में भी हर घटना का सही समय दर्ज होना जरूरी है। इससे किसी साइबर हमले के दौरान अलग-अलग सिस्टम में हुई गतिविधियों को सही क्रम में समझने में मदद मिलती है।
कौन तय करेगा भारतीय समय?
सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) भारतीय मानक समय का मुख्य वैज्ञानिक केंद्र है। यहां परमाणु घड़ियों की मदद से IST तैयार किया जाता है और इसे अंतरराष्ट्रीय समय UTC से बेहद सटीक स्तर पर मिलाकर रखा जाता है।
समय की सुविधा देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए अहमदाबाद, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, फरीदाबाद और गुवाहाटी में पांच क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गई हैं।
NavIC से भी मिलेगा सटीक समय
इसरो की NavIC प्रणाली के जरिए भी भारतीय मानक समय को उपग्रह के माध्यम से उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों और महत्वपूर्ण सेवाओं को भी भरोसेमंद समय संकेत मिल सकेगा।
आईएसटी को इंटरनेट नेटवर्क के जरिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा अत्यधिक सटीक समय की जरूरत वाले क्षेत्रों के लिए ऑप्टिकल फाइबर आधारित तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि नए नियमों से देश में एक समान, सटीक और भरोसेमंद समय व्यवस्था तैयार करने में मदद मिलेगी, जो डिजिटल सेवाओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी है।
