जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे सख्त, संसद से संशोधन विधेयक पारित

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

नई दिल्ली, 4 अगस्त, वाय के न्यूज। जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण पर सख्ती बढ़ाने वाला जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद से पारित हो गया है। राज्यसभा की मंजूरी मिलने के बाद विधेयक को संसद की स्वीकृति मिल गई। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन कर विलंबित पंजीकरण के संभावित दुरुपयोग को रोकना और समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना है।

संशोधन के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट अथवा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति से ही होगा। वहीं दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही किया जा सकेगा।

नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे और प्रत्येक मृत्यु का समय पर विधिवत पंजीकरण हो। इससे फर्जी पंजीकरण, रिकॉर्ड में हेरफेर और अन्य अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि देशभर में करीब 35 लाख पंजीकरण इकाइयां कार्यरत हैं। वर्ष 2014 में जन्म पंजीकरण का स्तर 86.6 प्रतिशत था, जो 2024 में बढ़कर 99 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसी तरह मृत्यु पंजीकरण 72.5 प्रतिशत से बढ़कर 99.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद दर्शना सिंह ने कहा कि जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि नागरिक की कानूनी पहचान का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि पंजीकरण प्रणाली के डिजिटलीकरण से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनी है।

हालांकि, बीजद सांसद डॉ. संतृप्त मिश्रा ने दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों को अनिवार्य रूप से प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजने के प्रावधान पर चिंता जताई। उनका कहना था कि अदालतों पर पहले से ही मामलों का बोझ है और इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

वाईएसआर कांग्रेस के मेदा रघुनाधा रेड्डी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि मजबूत नागरिक पंजीकरण प्रणाली पहचान संबंधी धोखाधड़ी रोकने के साथ-साथ प्रभावी शासन, नीति निर्माण और सार्वजनिक सेवाओं के बेहतर वितरण के लिए भी आवश्यक है।

चर्चा में कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, तृणमूल कांग्रेस की ममता ठाकुर, बीआरएस के रवि चंद्र वद्दीराजू और एआईएडीएमके के एम. धनपाल सहित कई सदस्यों ने भाग लिया। विधेयक पारित होने के बाद राज्यसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर