डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के आदेश
नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026, वाय के न्यूज। सर्वोच्च न्यायालय ने नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में हुए हालिया प्रदर्शनों के मामलों में गैर-आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 18 वर्ष से कम आयु के छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने प्रदर्शन से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के भी आदेश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने के आरोपों के मद्देनजर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी पुलिस के कथित अत्यधिक बल प्रयोग से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई।
पीठ ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही संबंधित राज्यों को निर्देश दिया कि वे प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा और अन्य कैमरों की रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड, पीसीआर लॉग तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखें।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि प्रदर्शनकारियों से एकत्र किसी भी डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखा जाए, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जाए।
अदालत ने दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन कहा है कि कार्यवाही लंबित रहने के दौरान पात्र छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कठोर (कोअर्सिव) कार्रवाई नहीं की जाए।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अधिकांश छात्र शांतिपूर्ण थे, लेकिन प्रदर्शनों में कुछ उपद्रवी तत्व भी शामिल थे। उन्होंने पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी उल्लेख किया। न्यायालय ने कहा कि जांच में सभी पक्षों के आरोपों और तथ्यों पर निष्पक्षता से विचार किया जाना चाहिए।
