दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली, 27 जुलाई। वाय के न्यूज। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को प्राप्त दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) में एक फोरेंसिक ऑडिटर शामिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने एसआईटी से दो सप्ताह के भीतर पहली स्थिति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि न्यायालय के सुझाव के बाद 25 जुलाई को अधिसूचना जारी कर एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी का नेतृत्व लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) एस. किरण कर रहे हैं।
सरकार ने अदालत को बताया कि एसआईटी में पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने जांच को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी टीम में शामिल करने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान में कथित गबन के आरोपों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच और ट्रस्ट के वित्तीय लेखापरीक्षण (फोरेंसिक ऑडिट) की मांग की गई है।
इससे पहले भी अदालत स्पष्ट कर चुकी है कि राम मंदिर दान मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। अभी तक किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
