कोरबा, 9 अगस्त। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने रविवार को कोरबा के अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास, सिविल लाइन थाना और बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया। कन्या छात्रावास में बालिकाओं की संख्या के अनुपात में पर्याप्त शौचालय नहीं होने और सैनिटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए जाने पर उन्होंने नाराजगी जताई और आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

डॉ. शर्मा ने कहा कि किशोरावस्था की बालिकाओं के स्वास्थ्य और व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं और बालिकाओं की आवश्यकताओं के बीच अंतर को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यवस्था में सुधार पर जोर दिया।
थाने में देखा संवेदना कक्ष
सिविल लाइन थाने के निरीक्षण के दौरान आयोग अध्यक्ष ने बाल कल्याण अधिकारी की व्यवस्था की जानकारी ली और संवेदना कक्ष का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली संवेदनशील होनी चाहिए। इसके लिए संवेदना कक्ष को और अधिक बाल सुलभ तथा सहज वातावरण वाला बनाने की आवश्यकता बताई।

बच्चों से आत्मीय संवाद, संप्रेक्षण गृह में सुधार
बाल संप्रेक्षण गृह पहुंचकर डॉ. शर्मा ने वहां रह रहे बच्चों से आत्मीयता से बातचीत की और उनकी समस्याओं तथा सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। निरीक्षण में पिछले दौरे की तुलना में संस्था में सुधार नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए गार्ड तथा साफ-सफाई के लिए सफाई कर्मी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि बालिकाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के मामलों में आयोग का रुख सख्त रहेगा। वहीं, बाल संप्रेक्षण गृह में रह रहे बच्चों के सुधार और पुनर्वास के लिए उन्हें सुरक्षित, संवेदनशील और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

