रायपुर, 23 अगस्त। वाय के न्यूज। छत्तीसगढ़ में सक्रिय मानसून के बीच बारिश अब कई इलाकों में जनजीवन और आवागमन को प्रभावित करने लगी है। नदी-नाले उफान पर हैं, कुछ गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है और पुल-पुलियों पर खतरा बढ़ा है। राजधानी रायपुर में भी तेज बारिश के बाद मुख्य मार्गों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। मौसम विभाग ने अगले दिनों में भी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है।
कन्हार से बरगा तक बढ़ा पानी
बलरामपुर के रामानुजगंज में कन्हार नदी तेज बहाव में है। नदी पर बने एनीकट को पार करने के दौरान एक युवक तेज बहाव में बह गया। घटना ने नदी और एनीकट के आसपास बढ़े जोखिम को सामने ला दिया है।
सूरजपुर के ओड़गी क्षेत्र में बरगा नदी के बढ़े जलस्तर से रसौकी गांव का संपर्क प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार गांव करीब छह दिनों से तहसील और जिला मुख्यालय से लगभग कटा हुआ है।
बिलासपुर में भी नदी-नालों के बढ़े बहाव के बीच एनीकट पर फंसे दो युवकों को रेस्क्यू करना पड़ा। बारिश से कुछ सड़कें डूबने और पुराने पुलों के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है।
रायपुर में मुख्य सड़कों पर पानी
राजधानी में शनिवार को करीब तीन घंटे तक तेज बारिश हुई। इसके बाद शहर के मुख्य मार्गों पर पानी भर गया और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। बारिश का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है, इसलिए निचले इलाकों में स्थिति बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
रायपुर में इससे पहले तेज बारिश के बाद एक नाले का बहाव इतना बढ़ गया था कि बाइक से उसे पार करने की कोशिश कर रहे दो युवक बह गए। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को बचा लिया गया।
इससे साफ है कि शहर में समस्या केवल सड़क पर जमा पानी तक सीमित नहीं है। तेज बारिश के दौरान नालों और छोटे जलमार्गों का बहाव भी अचानक खतरनाक हो रहा है।

जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर साल मानसून के दौरान तेज बारिश होने पर ऐसी स्थिति बनती है ।
(फोटो और रिपोर्ट: स्वराज्य करुण)
गांवों का संपर्क टूटना बड़ी चिंता
बारिश से सबसे गंभीर असर उन ग्रामीण इलाकों में है जहां पुल-पुलिया पहले से कमजोर हैं या नदी-नालों पर स्थायी संपर्क मार्ग उपलब्ध नहीं हैं। रसौकी इसका उदाहरण है, जहां बरगा नदी के बढ़े पानी के कारण गांव का संपर्क प्रभावित हुआ है। ऐसे इलाकों में स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, बाजार और जरूरी सामान की आपूर्ति भी प्रभावित होने का खतरा है।
बचाव तंत्र अलर्ट
बारिश और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र सक्रिय रखा गया है। हाल में सभी 33 जिलों में बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए मॉक ड्रिल के जरिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और रेस्क्यू व्यवस्था को परखा गया था।
प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय बचाव दलों के साथ राज्य और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया दलों की सहायता ली जा रही है। जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत सामग्री पहुंचाने और संपर्क बहाल करने पर जोर है।
एमसीबी में ‘जीरो डिले’ रिस्पॉन्स
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में संभावित बाढ़ की स्थिति के लिए ‘जीरो डिले’ रिस्पॉन्स व्यवस्था तैयार की गई है। इसमें नियंत्रण कक्ष, चेतावनी तंत्र, नाव, लाइफ जैकेट और अन्य बचाव संसाधनों को तत्काल इस्तेमाल के लिए तैयार रखने की व्यवस्था शामिल है।
अगले दिनों में भी बारिश का दौर
बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर आगे भी जारी रहने का अनुमान है। 23 अगस्त से अगले दो-तीन दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बताई गई है।
ऐसे में फिलहाल सबसे ज्यादा निगरानी नदी-नालों के किनारे बसे गांवों, निचले इलाकों, रपटों, एनीकटों और पुराने पुलों पर जरूरी है। राजधानी में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में संपर्क टूटने की घटनाएं बता रही हैं कि आने वाले बारिश के दौर में स्थानीय प्रशासन के लिए जलनिकासी और सड़क संपर्क बहाली बड़ी चुनौती रहेगी।
फिलहाल स्थिति एक नजर में
बलरामपुर: कन्हार में तेज बहाव, एनीकट पर हादसा।
सूरजपुर: बरगा नदी के कारण रसौकी गांव का संपर्क प्रभावित।
बिलासपुर: एनीकट पर फंसे लोगों का रेस्क्यू, ग्रामीण मार्ग प्रभावित।
रायपुर: मुख्य मार्गों और निचले इलाकों में जलभराव, नालों में तेज बहाव।
अन्य प्रभावित क्षेत्र: नदी-नालों, पुल-पुलियों और निचले मार्गों पर निगरानी बढ़ी।
बचाव तंत्र: स्थानीय प्रशासन के साथ SDRF/NDRF सहित आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को जरूरत के अनुसार सक्रिय रखा गया है।
(फ़ीचर्ड फोटो- इंडिया टुडे से साभार)
