गुदुम बाजा और मोहरी की धुनों से गूंजा ‘रंग-तरंग’, दूसरे दिन दिखी छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति

यह समाचार साझा करें

WhatsApp Facebook X

पढ़ने की सुविधा

अपनी सुविधा के अनुसार अक्षर और कंट्रास्ट चुनें।

अक्षर आकार

लोकवाद्यों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, कलाकारों और बच्चों का बढ़ाया उत्साह

रायपुर, 2 सितंबर 2026। गुदुम बाजा और मोहरी की पारंपरिक धुनों ने बुधवार को ‘रंग-तरंग’ के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति की अलग पहचान सामने रखी। लोकवाद्यों की प्रस्तुतियों के बीच कलाकारों ने पारंपरिक संगीत और लोक कला की झलक पेश की, जिसका दर्शकों ने आनंद लिया।

तीन दिवसीय ‘रंग-तरंग’ आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, साहित्य, संगीत और कला को एक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। दूसरे दिन खास तौर पर पारंपरिक लोकवाद्य केंद्र में रहे। गुदुम बाजा और मोहरी की प्रस्तुतियों ने आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ी लोक संगीत का माहौल बनाया।

कार्यक्रम में पूर्व संस्कृति आयुक्त अनिल कुमार साहू भी पहुंचे। उन्होंने लोक कलाकारों और बच्चों से मुलाकात की और उनकी प्रस्तुतियां देखीं। उन्होंने कलाकारों और आयोजन से जुड़े लोगों से लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर चर्चा की।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी साहित्य से जुड़े विजय मिश्रा, समाजसेवी उदयभान, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

आयोजकों के मुताबिक ‘रंग-तरंग’ का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, संगीत और साहित्य को एक साझा मंच देना है। आयोजन में लोक कलाकारों के साथ बच्चों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है।

पाठकों की पसंद

सबसे अधिक पढ़े गए

पिछले 7 दिनों के आधार पर