नई दिल्ली, 23 जुलाई 2026। गांवों में पेयजल आपूर्ति की निगरानी अब और आसान होगी। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित ग्रामीण जल सेवा वितरण, मापन और निगरानी प्रणाली का व्यावसायिक शुभारंभ किया है। इस प्रणाली की मदद से पानी की आपूर्ति, मात्रा और गुणवत्ता पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि नई प्रणाली का उद्देश्य ग्रामीण पेयजल योजनाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना है। इससे पानी की आपूर्ति में गड़बड़ी, रिसाव या अन्य समस्याओं की जानकारी समय रहते मिल सकेगी, जिससे उनका जल्द समाधान किया जा सकेगा।
इस अवसर पर सीएसआईआर ने चार स्वदेशी प्रौद्योगिकियां भी उद्योगों को हस्तांतरित कीं। मंत्रालय के अनुसार, इसका उद्देश्य देश में विकसित तकनीकों का व्यावसायिक उपयोग बढ़ाना और शोध को उद्योग तथा समाज के लिए उपयोगी बनाना है।
सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का व्यावसायीकरण शोध को उपयोगी उत्पादों और सेवाओं में बदलने का माध्यम है। उन्होंने वैज्ञानिकों से राष्ट्रीय जरूरतों और उद्योगों की मांग के अनुरूप अनुसंधान पर जोर देने का आग्रह किया।
क्या है नई IoT प्रणाली?
- जल टंकियों और पाइपलाइन पर लगे सेंसर पानी की मात्रा, दबाव और आपूर्ति की जानकारी जुटाएंगे।
- सभी आंकड़े रियल टाइम में ऑनलाइन डैशबोर्ड पर उपलब्ध होंगे।
- पानी की आपूर्ति बाधित होने या रिसाव जैसी समस्याओं का जल्द पता चल सकेगा।
- अधिकारियों को गांवों की जल योजनाओं की दूर से निगरानी करने में सुविधा मिलेगी।
- इससे जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति का प्रबंधन अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।
