कौशांबी, 31 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में सोमवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने एक बार फिर पटाखा निर्माण इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रयागराज-कौशांबी सीमा पर मोहम्मदपुर गांव में हुए विस्फोट से फैक्ट्री पूरी तरह ढह गई और आसपास के मकानों को भी नुकसान पहुंचा। राहत और बचाव अभियान के दौरान मृतकों और घायलों की संख्या के अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।
इस हादसे की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि कौशांबी में पटाखा निर्माण से जुड़ा यह पहला बड़ा हादसा नहीं है। फरवरी 2024 में भरवारी क्षेत्र की एक पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में सात लोगों की मौत हुई थी और सात लोग घायल हुए थे। उस समय पुलिस ने बताया था कि फैक्ट्री संचालक के पास पटाखे बनाने और बेचने का लाइसेंस था।
इससे पहले करीब चार साल पहले भरवारी में ही एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से तीन लोगों की मौत हुई थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, वह फैक्ट्री बिना लाइसेंस के घनी आबादी में संचालित हो रही थी। हादसे के बाद फैक्ट्री को सील कर संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
2024 के बाद फिर बड़ा हादसा
2024 के हादसे के बाद पटाखा निर्माण और भंडारण इकाइयों की सुरक्षा तथा लाइसेंसिंग व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। इसके बावजूद दो साल के भीतर मोहम्मदपुर में फिर इसी तरह का बड़ा विस्फोट सामने आया है।
मोहम्मदपुर में सोमवार दोपहर हुए विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि फैक्ट्री की इमारत मलबे में बदल गई। आसपास के मकान भी प्रभावित हुए। घटनास्थल प्रयागराज-कौशांबी सीमा पर है और मनौरी एयरफोर्स स्टेशन के नजदीक बताया गया है।
अब प्रशासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मोहम्मदपुर की इकाई को पटाखा निर्माण की अनुमति किस आधार पर मिली थी, वहां सुरक्षा मानकों का कितना पालन हो रहा था और आसपास की आबादी को देखते हुए फैक्ट्री के संचालन की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी।
फिलहाल प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों और फैक्ट्री में सुरक्षा एवं लाइसेंस संबंधी स्थिति की जांच की जा रही है।
