लोककला और जनजातीय संस्कृति का संगम
कोंडागांव, 12 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के प्रमुख पारंपरिक त्योहार हरेली के अवसर पर ‘हरेली महोत्सव 2026’ का आयोजन 16 अगस्त को कोंडागांव में किया जाएगा। बस्तर सांस्कृतिक, साहित्य एवं कला परिषद, जिला-कोंडागांव की ओर से आयोजित महोत्सव में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, लोकगीत, लोकनृत्य, लोककला, जनजातीय वाद्ययंत्र और हस्तशिल्प की प्रस्तुतियां होंगी।
महोत्सव का आयोजन ऑडिटोरियम, कोंडागांव में सुबह 11 बजे से होगा। इस वर्ष महोत्सव की थीम “हरियाली परंपरा अब संस्कृति के संगम” रखी गई है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप होंगे। वे वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन और सहकारिता विभाग के मंत्री हैं।
ये होंगे अति विशिष्ट अतिथि
महोत्सव में बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं विधायक लता उसेंडी, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम और हस्तशिल्प विकास बोर्ड, छत्तीसगढ़ शासन की अध्यक्ष शालिनी राजपूत अति विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगी।
पद्मश्री कलाकार भी होंगे शामिल
विशिष्ट अतिथियों में पद्मश्री पंडीराम मंडावी, काष्ठ शिल्पकार एवं जनजातीय वाद्ययंत्र कलाकार; पद्मश्री ऊषा बारले, पंडवानी गायिका; तथा पद्मश्री अजय कुमार मंडावी, काष्ठ शिल्पकार शामिल हैं।
इसके अलावा पंचराम सागर, अंतरराष्ट्रीय बेलमेटल हस्तशिल्पकार एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त; तीजूराम विश्वकर्मा, अंतरराष्ट्रीय लौह शिल्पकार एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त; तथा राजेंद्र बघेल, अंतरराष्ट्रीय बेलमेटल शिल्पकार एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त, विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।
विशिष्ट अतिथियों में जिला पंचायत कोंडागांव की अध्यक्ष रीता सोरी, जनपद पंचायत कोंडागांव की अध्यक्ष अनिता कोर्राम, नगर पालिका परिषद कोंडागांव के अध्यक्ष नरपति पटेल, नगर पालिका परिषद के उपाध्यक्ष जसकेट उसेंडी, लोक कलाकार एवं साहित्यकार लखेश्वर खुदराम, फिल्म निर्देशक अविनाश प्रसाद और फिल्म अभिनेता राकेश यादव भी शामिल हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बस्तर सांस्कृतिक, साहित्य एवं कला परिषद, कोंडागांव के अध्यक्ष गोकुल बैध करेंगे।
पारंपरिक वेशभूषा में आने की अपील
महोत्सव में पारंपरिक गोंडी नृत्य एवं प्रदर्शन, लोकगीत एवं लोकनृत्य, रेंगारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, छत्तीसगढ़ी लोककला एवं परंपराओं की झलक, पारंपरिक वेशभूषा एवं ग्रामीण परिवेश तथा हस्तशिल्प प्रदर्शन प्रमुख आकर्षण होंगे।
आयोजकों ने लोगों से पारंपरिक वेशभूषा में महोत्सव में शामिल होने की अपील की है। कार्यक्रम का संदेश “हमर माटी–हमर संस्कृति–हमर पहचान” रखा गया है।
